Odisha Desk, पुरी: ओडिशा के पवित्र तीर्थ स्थल पुरी के बड़ादांड (मुख्य मार्ग) पर इस समय केवल भक्ति, अटूट विश्वास और अपार उत्साह का माहौल है। करोड़ों उड़िया लोगों के साथ-साथ पूरे विश्व के आराध्य महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी का विशाल रथ ‘नंदीघोष’ धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए गुंडिचा मंदिर की ओर अग्रसर हो रहा है। महाप्रभु के रथ के पहियों की गड़गड़ाहट और भक्तों के गगनभेदी ‘जय जगन्नाथ’ के नारों से पूरा पुरी क्षेत्र गुंजायमान हो उठा है।

रथ यात्रा के मार्ग के दोनों ओर लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। ओडिशा के कोने-कोने समेत देश और विदेश के विभिन्न प्रांतों से आए श्रद्धालु अपने आराध्य महाप्रभु के दिव्य और मनमोहक मुखमंडल की एक झलक पाने के लिए घंटों से बड़ी ही व्याकुलता और बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ‘कालिया साआंत’ (भगवान जगन्नाथ) के उस करुणामयी और मुस्कुराते हुए चेहरे को निहारने के लिए भक्तों के मन में अनूठा उत्साह और गहरा आध्यात्मिक भाव देखा जा रहा है।

आज पुरी का बड़ादांड मानो भक्ति के एक विशाल महासंगम में तब्दील हो चुका है। जाति, धर्म और रंग-भेद से परे, भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी को छूने और उसे खींचने का सौभाग्य पाने की चाह ने सभी भक्तों को एकता के एक पवित्र सूत्र में बांध दिया है। वहां उपस्थित हर एक श्रद्धालु की जुबान पर केवल एक ही नाम है “जय जगन्नाथ”, और हर हृदय में केवल एक ही भाव है, महाप्रभु की असीम कृपा और उनका आशीर्वाद।

महाप्रभु जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ पीत (पीले) और लाल रंग के कपड़ों से सजाया गया है, जिसकी ऊंचाई लगभग 45 फीट है। इस रथ को खींचने के लिए भक्तों में हर साल भारी प्रतिस्पर्धा और उत्साह देखने को मिलता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान जो भी श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ को खींचता है या उनके दर्शन करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। महाप्रभु जगन्नाथ सात दिनों के लिए अपनी मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर में प्रवास करते हैं, जहां उन्हें विभिन्न प्रकार के छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुरी प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद हैं ताकि देश-विदेश से आए भक्तों को दर्शन करने में कोई असुविधा न हो।

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