रोहित कश्यप, मुंगेली। छत्तीसगढ़ सरकार जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं डिप्टी सीएम अरुण साव के गृह विधानसभा क्षेत्र लोरमी में एक गरीब परिवार का आशियाना पिछले तीन महीनों से प्रशासनिक स्टे की वजह से अधूरा पड़ा हुआ है। पीड़ित परिवार अब न्याय की मांग को लेकर कलेक्टर जनदर्शन पहुंचा है और चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो वह परिवार सहित धरने पर बैठने को मजबूर होगा।

मामला लोरमी तहसील क्षेत्र के ग्राम बेलसरी का है। यहां रहने वाले देवेंद्र कुमार और उनके परिजनों ने प्रशासन पर सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। पीड़ित के अनुसार ग्राम बेलसरी स्थित खसरा नंबर 143/3 में सड़क किनारे उनकी 13 डिसमिल निजी जमीन दर्ज है। इसी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके परिवार की सदस्य विमला बाई के नाम से आवास स्वीकृत हुआ था। परिवार अपने सपनों का घर बना रहा था और निर्माण कार्य चौखट स्तर तक पहुंच चुका था।

इसी दौरान पीछे की जमीन के मालिक मनमोहन साहू ने शिकायत दर्ज कराई कि मकान का निर्माण सरकारी जमीन पर किया जा रहा है। शिकायत के बाद तहसीलदार लोरमी ने 29 जनवरी 2026 को निर्माण कार्य पर स्टे लगा दिया। तब से लेकर अब तक निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है।
देवेंद्र कुमार का कहना है कि शिकायत पूरी तरह झूठी और दुर्भावनापूर्ण है। उनके पास जमीन से संबंधित सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें कई बार तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किया जा चुका है, लेकिन महीनों बाद भी प्रशासन ने कोई निर्णय नहीं लिया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि लगातार तहसील और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही। निर्माण कार्य रुके रहने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। परिवार का कहना है कि करीब 50 बोरी सीमेंट खराब हो चुकी है और बरसात से पहले मकान अधूरा रहने के कारण अब रहने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकार गरीबों को पक्का घर देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गरीब हितग्राही अपने ही निजी जमीन पर मकान बनाने के लिए महीनों से दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन निजी है और दस्तावेज स्पष्ट हैं, तो आखिर तीन महीने तक निर्माण कार्य पर रोक क्यों बनी हुई है? क्या प्रशासन शिकायत की निष्पक्ष जांच करने के बजाय केवल फाइलों में मामला उलझाए बैठा है, या फिर गरीब हितग्राही की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है?

इसी नाराजगी के बीच देवेंद्र कुमार अपने परिवार के साथ कलेक्टर जनदर्शन पहुंचे और आवेदन सौंपकर जल्द न्याय की मांग की। आवेदन में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि सात दिनों के भीतर स्टे नहीं हटाया गया तो परिवार सहित धरना देने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
वहीं इस मामले में जनदर्शन के दौरान शिकायत सुन रहे अपर कलेक्टर जीएल यादव ने कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि डिप्टी सीएम अरुण साव के गृह विधानसभा क्षेत्र में एक गरीब हितग्राही को समय पर न्याय मिल पाता है या फिर उसका अधूरा मकान प्रशासनिक फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
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