लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने 64 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था. उद्घाटन के समय इसे अमेरिका की तर्ज पर विकसित आधुनिक एक्सप्रेसवे बताया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद सड़क पर गड्ढे और दरारें नजर आने लगीं.
मामला सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कदम उठाए हैं. एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. वहीं परियोजना से जुड़े कई अधिकारियों पर भी गाज गिरी है.
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80 से ज्यादा गड्ढे मिले, पंखे और पन्नी से मरम्मत पर उठे सवाल
रियलिटी चेक में सामने आया कि लखनऊ से कानपुर के बीच बने एक्सप्रेसवे पर कई जगह सड़क की सतह खराब हो चुकी है. उन्नाव क्षेत्र में कई गड्ढे और क्रैक मिले. कुछ जगह सड़क किनारे पैच हाथों से उखड़ते नजर आए. बताया गया कि पूरे एक्सप्रेसवे पर 80 से ज्यादा गड्ढे पाए गए हैं. मरम्मत के दौरान कुछ जगहों पर सड़क को पन्नी से ढका गया और नमी सुखाने के लिए पंखों का इस्तेमाल किया गया. इसको लेकर भी सवाल खड़े हुए कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क इतनी जल्दी खराब कैसे हो गई.
अखिलेश यादव ने साधा निशाना, बीजेपी सरकार पर लगाए आरोप
एक्सप्रेसवे की खराब स्थिति को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तंज कसते हुए कहा कि उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही सड़क को मरम्मत की जरूरत पड़ गई. अखिलेश यादव ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी सरकार में बने प्रोजेक्ट “चलने से ज्यादा धंसते और गिरते हैं”. उन्होंने अटल प्रोग्रेस वे योजना को लेकर भी सवाल उठाए.
NHAI की कार्रवाई, अधिकारियों पर गिरी गाज
लगातार आलोचना के बाद NHAI ने निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ कार्रवाई की. कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया है. साथ ही परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का 2 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया है. प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटा दिया गया. इन अधिकारियों पर दो साल तक NHAI और सड़क परिवहन मंत्रालय की परियोजनाओं में रोक लगाई गई है.
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IIT खड़गपुर करेगा तकनीकी जांच, टोल वसूली रोकी गई
NHAI ने अब एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता जांच के लिए लेजर प्रोफिलोमीटर टेस्ट कराने का फैसला लिया है. इसके अलावा IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम सड़क की तकनीकी जांच करेगी. मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली बंद रहेगी. करीब तीन करोड़ रुपये की मरम्मत लागत निर्माण कंपनी को ही उठानी होगी. अब जांच रिपोर्ट से साफ होगा कि इतनी बड़ी परियोजना में लापरवाही कहां और कैसे हुई.


