हेमंत शर्मा, इंदौर। रक्षाबंधन के पर्व पर इंदौर एक बार फिर अपनी अनूठी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के लिए देशभर का ध्यान खींचने की तैयारी में है। खजराना गणेश मंदिर में इस बार भगवान गणेश को 40 इंच बाय 40 इंच की भव्य ‘सनातन राखी’ अर्पित की जाएगी। पालरेचा परिवार पिछले 24 वर्षों से इस परंपरा को निभाता आ रहा है।
ढाई महीने से चल रही तैयारी, राखी में दिखेगा सनातन संस्कृति का विराट रूप
मातृश्री पालरेचा परिवार के सदस्य पिछले करीब ढाई महीने से इस विशेष राखी को तैयार करने में जुटे हैं। परिवार पिछले 23 वर्षों से समुद्र मंथन, 12 ज्योतिर्लिंग, बेटी बचाओ, गंगाजल और नदियों जैसे राष्ट्रीय व सामाजिक विषयों पर आधारित राखियां बनाकर खजराना गणेश को अर्पित करता रहा है। इस बार भी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राखी को धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा गया है।
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर खास थीम
इस वर्ष राखी की सबसे खास बात इसका ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित विशेष थीम है। राखी के जरिए राष्ट्रीय गौरव और सनातन संस्कृति का संदेश देने की तैयारी है। दस्तावेज के मुताबिक, इस राखी को सिर्फ धार्मिक प्रतीक के तौर पर नहीं, बल्कि देश के समसामयिक विषयों, राष्ट्रीय गौरव और धार्मिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में तैयार किया जा रहा है।
कमल पुष्प पर सजेगा सनातन वैभव
राखी को कमल पुष्प के भव्य आकार में तैयार किया जा रहा है। इसमें सनातन संस्कृति के प्रमुख धार्मिक प्रतीकों को शामिल किया गया है। राखी में बाबा महाकाल को आगामी सिंहस्थ और महाकाल लोक की भव्यता का प्रतीक बताया गया है, जबकि भगवान जगन्नाथ जागृत आस्था और सांस्कृतिक एकता का संदेश देंगे। मां महाकाली और महालक्ष्मी के माध्यम से राष्ट्र की सुख-समृद्धि, संपन्नता और सनातन शक्ति की कामना का संदेश भी रखा गया है।
देश के चार बड़े शहरों की कला भी शामिल
इस विशाल राखी को तैयार करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से विशेष सामग्री मंगाई गई है। दस्तावेज के अनुसार कोलकाता, जयपुर, मुंबई और सूरत से मोती, नग, सितारे और जरदोजी की सामग्री मंगाकर राखी को सजाया जा रहा है।
24 साल की परंपरा, हर साल नया संदेश
पालरेचा परिवार की यह परंपरा सिर्फ राखी बांधने तक सीमित नहीं है। पिछले वर्षों में परिवार ने अलग-अलग राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों को राखियों के माध्यम से सामने रखा है। इस बार 40×40 इंच की विशाल राखी में सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष को एक साथ पिरोने की कोशिश की जा रही है।
इंदौर से देशभर तक जाएगा संदेश
मालवा की सांस्कृतिक राजधानी इंदौर में तैयार हो रही यह भव्य राखी रक्षाबंधन पर खजराना गणेश को अर्पित की जाएगी। परिवार का उद्देश्य लोक-परंपरा को धार्मिक कर्मकांड तक सीमित रखने के बजाय उसे राष्ट्रीय स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक संदेश से जोड़ना है। 40 इंच की विशाल राखी, 24 साल की परंपरा और ढाई महीने की मेहनत… इस बार खजराना गणेश के दरबार में सिर्फ राखी नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का एक विराट प्रतीक नजर आएगा।
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