Odisha Desk, पुरी: ओडिशा के प्रसिद्ध तीर्थस्थल पुरी स्थित श्रीमंदिर (जगन्नाथ मंदिर) में कल यानी 2 सितंबर (बुधवार) को महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा का सर्वसाधारण दर्शन लगभग साढ़े चार घंटे के लिए बंद रहेगा।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, दोपहर 2:30 बजे से शाम 7:00 बजे तक भक्त श्रीविग्रहों के दर्शन नहीं कर सकेंगे। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि (रेखा पंचमी) के अवसर पर श्रीमंदिर में महाप्रभु की विशेष एवं अत्यंत गुप्त ‘राहुरेखा लागी’ नीति (परंपरा) संपन्न की जाएगी।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) से मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार को प्रथम भोगमंडप भोग समाप्त होने के तुरंत बाद दोपहर 2:30 बजे से सर्वसाधारण दर्शन स्थगित कर दिया जाएगा। इस दौरान केवल नियत सेवायत ही गर्भगृह में उपस्थित रहेंगे और गुप्त नीति-विधान को पूरा करेंगे। शाम 7:00 बजे नीति संपन्न होने और महाप्रभु का महास्नान (महास्नान नीति) व अन्य अनुष्ठान पूरे होने के बाद मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए जाएंगे।

‘राहुरेखा लागी’ श्रीमंदिर की एक अत्यंत प्राचीन, पवित्र और गुप्त सेवा-नीति है, जो हर साल भाद्रपद कृष्ण पंचमी (रेखा पंचमी) को आयोजित की जाती है।

स्वर्ण राहुरेखा का महत्व: यह एक सोने की पट्टी (स्वर्ण आभूषण) होती है जो महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के श्रीमुख (मुखमंडल) के चारों ओर धारण कराई जाती है।

स्नान पूर्णिमा से जुड़ा इतिहास: ज्येष्ठ माह की स्नान पूर्णिमा के दिन जब महाप्रभु को 108 कलशों के जल से स्नान कराया जाता है, तब यह स्वर्ण राहुरेखा श्रीविग्रहों के मुख से उतार दी जाती है (ओलागी की जाती है)।

पुनः धारण कराने का विधान: अणसर (अनवसर) काल, रथयात्रा, बहुड़ा यात्रा और नीलाद्रि बीजे जैसी प्रमुख नीतियों के संपन्न होने के बाद, रेखा पंचमी के दिन इस स्वर्ण राहुरेखा को पुनः महाप्रभु के श्रीमुख पर स्थापित किया जाता है।

इस विशेष नीति को संपन्न करने का अधिकार श्रीमंदिर के विशेष सेवायतो,दैतापति और पतिमहापात्रों के पास होता है। नीति के दौरान गर्भगृह के मुख्य द्वार बंद कर दिए जाते हैं ताकि बाहरी व्यक्ति इस गुप्त विधान को न देख सके। स्वर्ण राहुरेखा को कसने के लिए विशेष पारंपरिक गोंद और विधि का उपयोग किया जाता है।

दूर-दराज से पुरी आने वाले भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे समय सारणी को ध्यान में रखकर ही श्रीमंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे। दोपहर 2:30 से शाम 7:00 बजे के बीच दर्शन पूरी तरह स्थगित रहेगा, लेकिन शाम को नीति समाप्त होने के बाद भक्त पुनः दर्शन का लाभ उठा सकेंगे।

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