NCP Both Factions May Merge: महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra politics) में अजित पवार (Ajit Pawar) के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी (अजित गुट) के भीतर पावर गेम और वर्चस्व की जंग तेज हो गई है। अजित पवार के बेटे सांसद पार्थ पवार (Parth Pawar) का एनसीपी संगठन में बढ़ते प्रभाव ने प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं को बेचैन कर दिया है। पार्थ पवार के सियासी हस्तक्षेप को लेकर वरिष्ठ नेताओं का असंतोष अब दिल्ली के सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। इसी का नतीजा है कि दो दिन पहले पार्टी के दिग्गज नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात की थी। अमित शाह के साथ हुई इस हाई-प्रोफाइल बैठक में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे, दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे और समीर भुजबल शामिल रहे। गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और सांसद पार्थ पवार मौजूद नहीं थे।

साथ ही महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में शरद पवार की एनसीपी और अजित पवार नीत एनसीपी के विलय की अटकलें भी जोरों पर हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित बारामती दौरे के आसपास इस विलय की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते भी अजित पवार की पार्टी के दिग्गज नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें लगता है कि विलय की स्थिति में पवार परिवार का सियासी दबदबा बढ़ेगा और पार्टी में उनका वर्चस्व कम होगा।

एनसीपी सूत्रों के मुताबिक संगठन में नए नेतृत्व के आने के बाद जिस तरह से नियुक्तियां और फैसले लिए जा रहे हैं, उससे पार्टी के पुराने व वरिष्ठ पदाधिकारी बेहद नाखुश हैं। वरिष्ठ नेताओं में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर सीधे बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से संवाद कर रहे हैं। इसके अलावा निर्वाचन आयोग को भेजे गए एक पत्र और पार्टी में प्रफुल्ल पटेल व सुनील तटकरे की भूमिका को लेकर भी नए नेतृत्व और पुराने नेताओं के बीच दूरियां बढ़ी हैं। 20 अक्टूबर को भी सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार ने अमित शाह से मुलाकात की थी, जिसमें प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे दिग्गज नेता मौजूद नहीं थे। सुनेत्रा पवार और पार्थ दोनों ही अपने लिहाज से राजनीति कर रहे हैं, जिसके चलते कई नेता बेचैन हैं।

मुलाकात को वित्त मंत्रालय की मांग बताया जा रहा

बता दें कि एनसीपी में लंबे समय से आंतरिक कलह चल रही है। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय की बहाली भी एनसीपी की प्रमुख मांगों में से एक है। पहले यह मंत्रालय अजीत पवार के पास था। उनके जाने के बाद NCP के वरिष्ठ नेता आगामी कैबिनेट फेरबदल में इस पोर्टफोलियो की बहाली की मांग कर रहे हैं। 25 अक्टूबर को मुंबई में अजित पवार के सरकारी आवास ‘देवगिरी’ में हुई कोर कमेटी की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। 25 अक्टूबर को मुंबई में हुई कोर कमेटी की बैठक के बाद छगन भुजबल ने स्पष्ट किया था वित्त मंत्रालय को फिर से हासिल करने पर सहमति बनी है। दोनों एनसीपी गुटों के विलय पर आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है। पहले अमित शाह से सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की मुलाकात को वित्त मंत्रालय की डिमांड के रूप में पेश किया जा रहा था। अब एनसीपी के दिग्गजों की शाह से मुलाकात से कहानी ज्यादा दिलचस्प हो गई है।

एनसीपी ने मतभेदों के दावों को किया खारिज

फिलहाल दूसरी तरफ पार्टी में गुटबाजी और कलह की खबरों पर NCP के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने सफाई दी है। उन्होंने अमित शाह के साथ हुई बैठक को पूरी तरह से औपचारिक और पूर्व-निर्धारित बताया। उमेश पाटिल ने कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें जानबूझकर पार्टी के भीतर अनबन और दरार की झूठी खबरें फैला रही हैं।उन्होंने कहा कि मुलाकात को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने और पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों तथा तालमेल की कमी का विमर्श गढ़ने की कोशिशें की जा रही हैं।

संजय राउत का भी आया बयान

मामले में शिवसेना (UBT) के MP संजय राउत का भी बयान आया है। संजय राउत ने कहा कि अमित शाह ने महाराष्ट्र को कमज़ोर करने के लिए (NCP के) दो गुट बना दिए हैं। आने वाले दिनों में, दोनों गुट अपना राजनीतिक वजूद खो देंगे। अजित पवार के बाद, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी अनाथ हो गई है। यह पार्टी सिर्फ़ शरद पवार की है। शिवसेना सिर्फ़ उद्धव ठाकरे की है। ये नेता BJP के इशारे पर काम करते हैं।

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