गुलशन कुमार, महेंद्रगढ़। हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के रहने वाले युवक अंकित ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सिस्टम की सुरक्षा में खामियों को लेकर एक बड़ा दावा किया है। अंकित का कहना है कि उसने UPI भुगतान प्रणाली में मौजूद कुछ ऐसी कमियों की पहचान की है, जिनका फायदा उठाकर साइबर ठग रोजाना आम लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं। अंकित ने इन खामियों से बचाव के लिए एक नया वैकल्पिक सुरक्षा सिस्टम तैयार करने का भी दावा किया है। उसका कहना है कि यदि इस सिस्टम को UPI के साथ जोड़ा जाता है, तो देश में साइबर फ्रॉड की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

पिता के साथ 2020 में हुई ठगी के बाद शुरू की रिसर्च

अंकित के इस रिसर्च के पीछे एक निजी दर्दनाक घटना जुड़ी हुई है। वर्ष 2020 में उसके पिता साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए थे। इस घटना के बाद अंकित ने साइबर अपराधियों के काम करने के तरीकों को गहराई से समझने और उनसे बचाव के तकनीकी उपाय तलाशने पर काम शुरू किया। लगातार कई वर्षों की मेहनत और तकनीकी प्रयोगों के बाद उसने एक ऐसा सिस्टम विकसित करने का दावा किया है, जो डिजिटल भुगतान के दौरान सुरक्षा की अतिरिक्त परत (Security Layer) के रूप में काम कर सकता है। अंकित ने अपने खुद के अकाउंट पर डेमो के माध्यम से यह भी दिखाया कि कैसे फर्जी लिंक और अन्य जरियों से ठग लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

पढ़ाई छोड़ फीस के पैसों से खरीदा लैपटॉप

साइबर सुरक्षा के इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अंकित को काफी आर्थिक और व्यक्तिगत संघर्षों का सामना करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उसके सामने B.Tech की पढ़ाई जारी रखने के लिए फीस भरने या रिसर्च के लिए नया लैपटॉप खरीदने में से किसी एक को चुनने की चुनौती थी। अंकित ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर साइबर सुरक्षा के इस काम को प्राथमिकता दी और फीस के पैसों से नया लैपटॉप खरीदा। कई सालों के कड़े परिश्रम के बाद अब वह अपना तैयार किया गया सिस्टम लेकर सामने आया है।

सरकार से सिस्टम की तकनीकी जांच कराने की अपील

अंकित का कहना है कि उसका मकसद किसी प्रणाली में खामियां निकालना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की मेहनत की कमाई को ठगों से बचाना है। उसने बताया कि वह कई बार शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों को अपनी इस तकनीक के बारे में जानकारी देने की कोशिश कर चुका है, लेकिन उसे अब तक अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली है। अंकित ने सरकार से मांग की है कि उसके द्वारा विकसित किए गए सिस्टम का स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जाए और यदि यह कारगर साबित होता है तो इसे राष्ट्रीय स्तर पर UPI के साथ एकीकृत करने पर विचार किया जाए।

विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद ही स्पष्ट होगी प्रभावशीलता

अंकित का यह प्रयास व्यक्तिगत स्तर पर एक बड़ी पहल माना जा रहा है। हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस दावे की निष्पक्ष जांच और परीक्षण के बाद ही इसकी वास्तविक प्रभावशीलता स्पष्ट हो सकेगी। यदि जांच में अंकित का बनाया सिस्टम सही पाया जाता है, तो यह देश भर में ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m