सहारनपुर. जमीयत उलमा-ए-हिंद (M) के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि मुसलमानों को भारत में दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश करने वाले देश के दुश्मन हैं. उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी की दया या सांप्रदायिक संगठनों की मेहरबानी से इस देश में नहीं रह रहे हैं. उनके पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई में बलिदान दिए हैं. उनकी कब्रें इस इतिहास की गवाही देती हैं.
मदनी मेवात के नूंह स्थित गांव पिपाका में जमीयत की दो दिवसीय गवर्निंग काउंसिल की बैठक को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने धार्मिक नफरत, मॉब लिंचिंग, बुलडोजर कार्रवाई और वक्फ कानून सहित कई मुद्दे उठाए.
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‘बहुसंख्यक नहीं, सत्ता की भूख खतरे में’
मदनी ने कहा कि देश में नफरत और विभाजन का माहौल लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रहा है. इसका असर केवल मुसलमानों पर नहीं, बल्कि दलितों और वंचित वर्गों पर भी पड़ रहा है. उन्होंने बहुसंख्यक समुदाय को खतरे में बताने वाले राजनीतिक नैरेटिव पर सवाल उठाया. कहा कि खतरे में बहुसंख्यक नहीं, बल्कि सत्ता और पदों की भूख है.
मदनी ने दावा किया कि पिछले एक साल में नफरत फैलाने वाले भाषणों की 1,600 से अधिक सत्यापित घटनाएं सामने आईं. इनमें 87 प्रतिशत मामलों में FIR तक दर्ज नहीं हुई. उन्होंने हर जिले में पुलिस अधीक्षक स्तर के नोडल अधिकारी और ऐसे अपराधों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मांग की.
‘बुलडोजर संविधान और न्यायपालिका की गरिमा गिराता है’
बुलडोजर कार्रवाई पर मदनी ने कहा कि प्रशासन न्यायपालिका की भूमिका निभाने लगा है. बिना कानूनी प्रक्रिया के किसी का घर या संपत्ति गिराना संविधान के सिद्धांतों का उल्लंघन है. उन्होंने इसे बुलडोजर न्याय बताते हुए कहा कि इससे कानून के शासन और न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचता है.
वक्फ कानून पर पुनर्विचार की मांग
जमीयत की बैठक में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताया गया. संगठन ने केंद्र से कानून पर पुनर्विचार करने की मांग की. वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की तर्ज पर स्वतंत्र संस्था बनाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया. बैठक में फिलिस्तीन को स्वतंत्र देश बनाने, गाजा तक मानवीय सहायता पहुंचाने और युद्धविराम की मांग भी उठाई गई.
‘शिकायत करना बंद करें, काम करने के लिए आगे आएं’
मदनी ने कार्यकर्ताओं और युवाओं से केवल शिकायत करने के बजाय सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की. उन्होंने कहा कि जीवंत कौमें हालात की शिकायत नहीं करतीं, बल्कि अपने प्रयासों से इतिहास बदलती हैं. बैठक में किसानों, छात्रों, दलितों और दूसरे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने का संकल्प लिया गया. दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी सहित कई पदाधिकारियों ने भी युवाओं को जिम्मेदारी देने और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया.

