US PERM Suspension: अमेरिकी सरकार ने भारतीय IT प्रोफेशनल्स और बड़ी टेक कंपनियों को बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग (Department of Labor) ने Infosys, TCS, Wipro, HCL, Cognizant और Capgemini समेत कई कंपनियों के Permanent Labor Certification (PERM) प्रोग्राम को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। Microsoft और Adobe भी इस कार्रवाई के दायरे में हैं।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर पड़ेगा असर
PERM सस्पेंड होने से खासतौर पर वे विदेशी कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं, जो अमेरिका में अस्थायी वर्क वीजा पर काम कर रहे हैं और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में हैं। कंपनियां निलंबन की अवधि में नए PERM आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगी, जबकि पहले से चल रहे कुछ आवेदन भी प्रभावित हो सकते हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में PERM सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया। मामले में कई संघीय जांच चलने की बात कही गई है।
Microsoft पर सबसे गंभीर आरोप
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग ने कार्रवाई की घोषणा करते हुए कई बड़ी कंपनियों का नाम लिया। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने Microsoft पर विशेष रूप से गंभीर आरोप लगाए।
उनके मुताबिक, Microsoft ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि इसी अवधि में कंपनी को 6,000 से ज्यादा H-1B वीजा मंजूर हुए और उसने करीब 3,682 PERM आवेदन दाखिल किए। इनमें लगभग 1,000 आवेदन कथित तौर पर उन्हीं पदों से जुड़े थे, जिन पर अमेरिकी कर्मचारियों को हटाया गया था।
क्या H-1B वीजा रद्द होंगे?
नहीं। PERM सस्पेंशन का मतलब H-1B वीजा रद्द होना नहीं है। प्रभावित कंपनियां अपने H-1B कर्मचारियों को नौकरी पर रख सकती हैं। हालांकि, नए PERM आवेदन रुकने से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी हो सकती है और कंपनियों पर कानूनी व प्रशासनिक लागत बढ़ सकती है।
क्या है PERM?
PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिकी श्रम विभाग की एक प्रक्रिया है, जिसके जरिए कंपनियां विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं। इस कार्रवाई से अमेरिका में काम कर रहे हजारों भारतीय IT प्रोफेशनल्स की इमिग्रेशन योजनाओं पर असर पड़ने की आशंका है।
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