शब्बीर अहमद, भोपाल। राजधानी भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। नियमों के विपरीत जाकर आरोपियों को सुविधाएं मुहैया कराने के आरोप में भोपाल सेंट्रल जेल की डिप्टी जेलर जया यादव को पद से हटा दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले की पुलिस जांच पर मृतका के परिजनों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे केस में सस्पेंस और अधिक गहरा गया है।
VIP ट्रीटमेंट देने के आरोप में डिप्टी जेलर पर गिरी गाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल सेंट्रल जेल में बंद इस मामले के मुख्य आरोपी मां-बेटे को वीआईपी (VIP) ट्रीटमेंट दिए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी (DIG) संजय पांडे ने जेल का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद डीआईजी पांडे ने महानिदेशक को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी थी। जेल मुख्यालय द्वारा कराई गई जांच में डिप्टी जेलर पर लगे आरोप सही पाए गए। नियमों के ताक पर रखकर आरोपियों को अवैध सुविधाएं देने की पुष्टि होने के बाद, निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करते हुए डिप्टी जेलर जया यादव को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
‘बेल्ट’ को लेकर नया विवाद, जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच एक नए विवाद में घिर गई है। घटनास्थल से बेल्ट की बरामदगी को लेकर नया सस्पेंस खड़ा हो गया है। मामले में अब यह नया मोड़ आया है कि घटना के वक्त मौके पर दो बेल्ट मौजूद होने का दावा किया जा रहा है।मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने बिना किसी निशानदेही (औपचारिक पहचान/पॉइंटिंग आउट) के ही बेल्ट को जब्त कर लिया। परिजनों द्वारा प्रक्रिया पर उठाए गए तीखे सवालों के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि आखिर ट्विशा की मौत किस बेल्ट से हुई थी?
मोबाइल और लैपटॉप जब्ती भी संशय के घेरे में
परिजनों ने केवल बेल्ट ही नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा मृतका के मोबाइल और लैपटॉप को जब्त किए जाने की पूरी प्रक्रिया पर भी उंगली उठाई है। जांच के तरीकों और साक्ष्यों को जुटाने में बरती गई कथित लापरवाही के चलते अब पूरी तफ्तीश पर ही सस्पेंस के बादल मंडराने लगे हैं। परिजनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए ताकि सच सामने आ सके।


