दुर्ग। साइबर ठगी और ऑनलाइन सट्टे के बढ़ते मामलों के बीच दुर्ग पुलिस ने अपराधियों के वित्तीय नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने वर्ष 2026 में 1 जनवरी से 29 जुलाई तक जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टे में इस्तेमाल किए जा रहे 1242 म्यूल बैंक खातों की पहचान कर 18 प्रकरणों में वैधानिक कार्रवाई की है। इस दौरान 117 म्यूल खाताधारकों और 5 म्यूल एजेंटों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है। वहीं करीब 3 करोड़ रुपये की डिस्प्यूट राशि पर होल्ड किया गया है।
दुर्ग पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण के जरिए करीब 2000 अन्य संदिग्ध म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई है। इन खातों से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है और चरणबद्ध तरीके से वैधानिक कार्रवाई जारी है।

साइबर ठगी की रकम को छिपाने में होता था म्यूल खातों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन सट्टा और कस्टमर केयर फ्रॉड जैसे अपराधों से हासिल रकम को छिपाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। अपराधी कमीशन, नौकरी या आसान कमाई का लालच देकर लोगों से उनके बैंक खाते हासिल करते थे। कई मामलों में उनके नाम से नए बैंक खाते खुलवाकर खातों के साथ एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, सिम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी सुविधाओं का भी उपयोग किया जाता था।
साइबर ठगी से प्राप्त रकम सबसे पहले लेयर-1 यानी म्यूल खातों में जमा की जाती थी। इसके बाद कुछ ही समय में रकम को कई बैंक खातों में छोटे-छोटे हिस्सों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। इस प्रक्रिया को लेयरिंग के जरिए वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी तक पहुंच को मुश्किल बनाने का प्रयास किया जाता था। बाद में रकम को एटीएम, यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, ई-वॉलेट और नकद निकासी के माध्यम से मुख्य अपराधियों तक पहुंचाया जाता था।
बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
दुर्ग पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान कुछ बैंक शाखाओं के अधिकारियों और बैंक प्रबंधकों की भूमिका भी सामने आई है, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस द्वारा खाते खोलने की प्रक्रिया, केवाईसी सत्यापन, संदिग्ध लेन-देन की निगरानी और नियामकीय प्रावधानों के पालन की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अधिकारी की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उन्हें भी आरोपी बनाकर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इन डिजिटल साक्ष्यों का किया जा रहा विश्लेषण
पुलिस टीम द्वारा बैंकिंग रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल डेटा, आईपी लॉग, यूपीआई ट्रांजेक्शन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। इसके आधार पर पूरे मनी ट्रेल की जांच करते हुए नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, म्यूल एजेंटों और सहयोगियों की पहचान की जा रही है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, केवाईसी दस्तावेज, बैंकिंग एवं डिजिटल रिकॉर्ड सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए हैं।
दुर्ग पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल सिम, ओटीपी, यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध कराना या किसी अन्य व्यक्ति के लिए बैंकिंग लेन-देन करना भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता किराए पर लेने, कमीशन देने या बैंकिंग सुविधाओं के इस्तेमाल का प्रस्ताव देता है तो इसकी सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या नजदीकी पुलिस थाने को दें। दुर्ग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध और ऑनलाइन सट्टे के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।
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