कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (MP High Court) ने साल 2013 की पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक लंबे समय से चले आ रहे विवाद में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सूबेदार, उप निरीक्षक (SI) और प्लाटून कमांडर के पदों के लिए वर्ष 2015 में जारी की गई मेरिट सूची के विवादित हिस्से को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही अदालत ने शासन और संबंधित विभागों को 12 सप्ताह (3 महीने) के भीतर नए सिरे से संशोधित मेरिट सूची जारी करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को राहत, नहीं जाएगी नौकरी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पहले से चयनित और सेवारत आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्तियां निरस्त नहीं की जाएंगी। अदालत ने निर्देश दिया है कि आरक्षित पदों पर पूर्व में किए गए गलत समायोजन (Adjustment) को हटाकर नियमों के तहत नए सिरे से मेरिट सूची तैयार की जाए।
क्या था मामला और याचिकाकर्ताओं का तर्क?
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2013 की पुलिस भर्ती परीक्षा में अपनाए गए नियमों और पदों के आवंटन को लेकर था। गलत पद आवंटन का आरोप: याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए तर्क दिया गया था कि परीक्षा में 162 अंक प्राप्त करने और जिला पुलिस बल (SI) को अपनी प्राथमिकता बताने के बावजूद उन्हें प्लाटून कमांडर का पद आवंटित कर दिया गया था।
जन्म तारीख बदलने के मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसलाः CMO महेश्वर का आदेश निरस्त
नियमों की अनदेखी
याचिका में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया था कि आयु सीमा में छूट (Age Relaxation) लेने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को कायदे से उनके कोटे में रखना था, लेकिन उन्हें अनारक्षित (General) पदों पर गलत तरीके से समायोजित कर लिया गया था, जिससे कई योग्य अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे। हाईCourt के इस ऐतिहासिक फैसले से उन तमाम उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है जो वर्षों से अपनी सही पदस्थापना और न्याय की लड़ाई लड़ रहे थे। अदालत के आदेश के बाद अब पुलिस भर्ती बोर्ड को तय समयसीमा में नई मेरिट लिस्ट तैयार करनी होगी।
शैल्बी अस्पताल में मरीज की मौत पर जोरदार हंगामाः घर से चलकर आईं और 3 घंटे में मौत,

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

