संजय पाटीदार, भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच अब बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मामले की तह तक जाने के लिए सीबीआई की टीम ने अब डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है, जिससे इस केस से जुड़े कई बड़े राज़ खुलने की उम्मीद है।
लैपटॉप की तकनीकी जांच पूरी
जांच एजेंसियों से मिल रही शुरुआती जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने इस मामले में जब्त किए गए लैपटॉप की विस्तृत तकनीकी जांच (Technical Examination) को पूरा कर लिया है। लैपटॉप के डेटा विश्लेषण से मिले इनपुट्स के आधार पर अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
डिलीट चैट और व्हाट्सएप बैकअप पर फोकस
लैपटॉप की जांच के बाद सीबीआई का पूरा फोकस अब मोबाइल डेटा पर है। बताया जा रहा है कि एजेंसी। मोबाइल से डिलीट किए जा चुके चैट्स को रिकवर करने की कोशिश कर रही है। आरोपी और संबंधित व्यक्तियों के व्हाट्सएप बैकअप को खंगाल रही है, ताकि घटना से जुड़े अहम सुराग हाथ लग सकें।
डेटा सुरक्षा के लिए ‘क्लोनिंग तकनीक’ का इस्तेमाल
सीबीआई इस जांच में आधुनिक वैज्ञानिक और फॉरेंसिक तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। मूल सबूतों (Original Data) के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या उनके नष्ट होने के जोखिम से बचने के लिए ‘डेटा क्लोनिंग तकनीक’ (Cloning Technology) की मदद ली जा रही है। क्लोन किए गए डेटा पर ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अपनी पड़ताल आगे बढ़ा रहे हैं।
‘टाइमलाइन एनालिसिस’ से जुड़ेंगी कड़ियां
केस को पूरी तरह डिकोड करने के लिए सीबीआई की टीम ‘टाइमलाइन एनालिसिस’ (Timeline Analysis) कर रही है। इसके जरिए। घटना के ठीक पहले और घटना के वक्त की एक-एक मिनट की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा रहा है। उस दौरान कौन किससे संपर्क में था और डिजिटल एक्टिविटी क्या थी, इसका पूरा खाका तैयार किया जा रहा है। सीबीआई की यह कार्रवाई साफ करती है कि एजेंसी अब किसी भी तरह की मानवीय गवाही से इतर ठोस डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों के जरिए आरोपियों को घेरने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में डिलीटेड डेटा रिकवर होते ही इस केस में बड़े खुलासे हो सकते हैं।


