Rajasthan OPS News: राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर एक बार फिर हड़कंप मच गया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने राज्य सरकार को एक कड़ा नोटिस जारी करते हुए हिसाब-किताब मांग लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली से आए इस आदेश के बाद वित्त विभाग की रातों की नींद उड़ गई है। अब सरकार को यह साबित करना होगा कि लाखों कर्मचारियों को पेंशन देने के चक्कर में राजस्थान का विकास तो नहीं थम जाएगा।

अगले 10 साल का लेखा-जोखा तलब

CAG ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि राजस्थान सरकार एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। इस रिपोर्ट में कोई हवाई बातें नहीं, बल्कि ठोस आंकड़े होने चाहिए। सरकार को बताना होगा कि अगले 10 सालों में OPS की वजह से सरकारी खजाने पर कितना बड़ा ‘बम’ फूटने वाला है। इसमें राज्य की मौजूदा बजट स्थिति और आने वाले राजस्व का पूरा खाका पेश करना अनिवार्य कर दिया गया है।

FRBM एक्ट के जाल में फंसी सरकार!

यह कोई सामान्य पूछताछ नहीं है। CAG ने यह जानकारी वित्तीय जिम्मेदारी एवं बजट प्रबंधन अधिनियम (FRBM Act) के तहत मांगी है। आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा कानूनी चाबुक है जो राज्यों को अपनी औकात से ज्यादा कर्ज लेने या फिजूलखर्ची करने से रोकता है। जयपुर के सचिवालय में चर्चा है कि अगर रिपोर्ट में वित्तीय संतुलन बिगड़ता दिखा, तो सरकार के लिए आगे की राह काफी मुश्किल हो जाएगी।

क्या है असली माजरा?

याद दिला दें कि साल 2022 में गहलोत सरकार ने पुरानी पेंशन बहाल करके पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन तभी से दिल्ली और जयपुर के बीच इसे लेकर खींचतान जारी है। अब 15 जून की डेडलाइन तय की गई है। प्रशासन ने कमर कस ली है और अधिकारी फाइलों को खंगालने में जुट गए हैं। सवाल यह है कि क्या राजस्थान का खजाना भविष्य में लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों का बोझ सह पाएगा या फिर विकास कार्यों के बजट में कटौती करनी पड़ेगी?

पढ़ें ये खबरें