अमित पाण्डेय, डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ भाजपा में आखिरकार उस संगठनात्मक संकट के बाद नई तस्वीर सामने आ गई है, जिसने पिछले कुछ महीनों में पार्टी के स्थानीय संगठन को हिलाकर रख दिया था। शहर मंडल की नई टीम में सौमित्र सोनी को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि विनय बंसल और अमित बोस को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव इसलिए अहम है, क्योंकि इससे पहले डोंगरगढ़ शहर मंडल की पूरी कार्यसमिति को भंग कर दिया गया था। यह कार्रवाई 111 कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे और लगातार बढ़ते संगठनात्मक विवाद के बीच हुई थी। मंडल भंग करने के साथ पांच कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित भी किया गया था। अब नए सिरे से मंडल गठन के साथ भाजपा ने डोंगरगढ़ में संगठन की गाड़ी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की है।
111 इस्तीफों से शुरू हुआ था विवाद
27 जुलाई को डोंगरगढ़ शहर भाजपा मंडल में उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब 111 कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। इसमें मंडल, जिला और प्रदेश स्तर से जुड़े पदाधिकारी, पूर्व पदाधिकारी, पूर्व पार्षद, बूथ अध्यक्ष, शक्ति केंद्र प्रभारी और सक्रिय कार्यकर्ता शामिल थे। इसके बाद इस्तीफों का सिलसिला थमा नहीं। 111 के बाद करीब दो दर्जन से ज्यादा और पदाधिकारी-कार्यकर्ता इस्तीफा देने वालों में शामिल हुए। इस पूरे घटनाक्रम ने डोंगरगढ़ भाजपा के भीतर चल रहे असंतोष को खुलकर सामने ला दिया। आखिरकार 6 अगस्त को प्रदेश संगठन ने डोंगरगढ़ शहर मंडल इकाई को भंग कर दिया और पांच कार्यकर्ताओं , प्रिंस कक्कड़, अनिल पांडेय, वीरेंद्र साहू, संतोष राव और परविंदर सिंह मोंटी को निष्कासित कर दिया। इसके साथ ही संकेत साफ था कि पुराने ढांचे को हटाकर संगठन का पुनर्गठन किया जाएगा।


अब सौमित्र सोनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
नई जिम्मेदारी के साथ सबसे ज्यादा नजर सौमित्र सोनी पर रहेगी। इसकी वजह सिर्फ उनका नया पद नहीं है। सौमित्र सोनी, डोंगरगढ़ भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष और जमीनी संगठन में सक्रिय रहे स्व.चमन सोनी के पुत्र हैं। यानी नई टीम में अध्यक्ष के तौर पर ऐसे परिवार से चेहरा आया है जिसकी डोंगरगढ़ भाजपा संगठन में पहले से पहचान रही है, लेकिन इस राजनीतिक विरासत को अब संगठनात्मक प्रदर्शन में बदलना सौमित्र सोनी के सामने बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि जिस मंडल की कमान उन्हें मिली है, वहां हाल में कार्यकर्ताओं का एक बड़ा समूह संगठन से नाराज होकर इस्तीफा दे चुका है।
अध्यक्ष के साथ विनय बंसल और अमित बोस को महामंत्री बनाया गया है। दोनों की जिम्मेदारी सिर्फ संगठनात्मक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी। नई टीम को बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना होगा और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद बढ़ाना होगा। खास तौर पर ऐसे समय में जब पुराने विवाद के बाद संगठन में कई सवाल खड़े हुए हैं, महामंत्रियों की भूमिका अध्यक्ष के साथ समन्वय बनाकर संगठन को दोबारा सक्रिय करने में महत्वपूर्ण होगी।
सवाल सिर्फ नई टीम का नहीं, पुराने कार्यकर्ताओं की वापसी का भी
डोंगरगढ़ भाजपा में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई टीम पुराने विवाद के बाद पैदा हुई दूरी को कितना कम कर पाती है।सामूहिक इस्तीफों के बाद मंडल भंग हुआ, कार्रवाई हुई और अब नई टीम आ गई है। लेकिन संगठन की मजबूती केवल नए पदाधिकारियों की घोषणा से नहीं होगी। असली परीक्षा तब होगी, जब नाराज और अलग हुए कार्यकर्ताओं को दोबारा संगठन के साथ जोड़ा जाएगा। नई टीम के सामने एक तरफ संगठन को एकजुट करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ बूथ स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को फिर गति देने की जिम्मेदारी।
डोंगरगढ़ भाजपा में अब ‘रीसेट’ के बाद नई पारी
कुल मिलाकर डोंगरगढ़ शहर भाजपा मंडल में यह सिर्फ पदों का बदलाव नहीं है। 111 इस्तीफों से शुरू हुए विवाद, मंडल कार्यसमिति के भंग होने और संगठनात्मक कार्रवाई के बाद अब भाजपा ने नई टीम के साथ नई पारी शुरू की है।सौमित्र सोनी को अध्यक्ष, विनय बंसल और अमित बोस को महामंत्री की जिम्मेदारी देकर संगठन ने चेहरों का नया संयोजन तैयार किया है, अब देखना यह होगा कि नई टीम पुराने विवाद की परछाईं से बाहर निकलकर डोंगरगढ़ भाजपा को कितना एकजुट कर पाती है और जिन कार्यकर्ताओं के इस्तीफों से संगठन हिला था, उनमें से कितनों को दोबारा अपने साथ जोड़ पाती है।
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H



