शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश के करीब डेढ़ लाख शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाए रखने के मामले में राज्य सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि TET अनिवार्यता के अपने पिछले फैसले में पहले ही पर्याप्त छूट दी जा चुकी है। अब बिना TET पास किए कोई शिक्षक नियुक्त नहीं हो सकेगा और पुराने शिक्षकों को भी नियमों का पालन करना होगा।
मुख्य फैसले के प्रमुख बिंदु:
- TET अनिवार्यता बरकरार: 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों सहित सभी को TET पास करना अनिवार्य रहेगा। कोर्ट ने TET खत्म करने या पूरी छूट देने की मांग खारिज कर दी।
- समय सीमा में बढ़ोतरी: पात्रता परीक्षा की वैधता 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी गई है। शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना होगा।
- 5 साल से कम सेवा वाले शिक्षकों को छूट: जिन शिक्षकों की नौकरी में 5 साल से कम समय बचा है, उन्हें TET पास करने की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। हालांकि, वे पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे यदि TET पास नहीं किया।
- भविष्य की भर्तियों में सख्ती: नई भर्तियों में बिना TET के किसी भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं होगी।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के मूल फैसले पर आधारित है, जिसमें इन-सर्विस शिक्षकों (क्लास 1 से 8) के लिए TET को अनिवार्य किया गया था। राज्य सरकार और शिक्षक संगठनों ने इस पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त ढील नहीं दी जा सकती।
इस फैसले से हजारों शिक्षक निराश हैं, जिन्हें अब TET की तैयारी करनी होगी। वहीं, कुछ शिक्षकों को समय सीमा बढ़ने और 5 साल वाले नियम से थोड़ी राहत मिली है। मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही शिक्षकों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया था और पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

