नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद दिल्ली सरकार एक्शन मोड में आ गई है। गुरुवार को सरकार ने घटना की समीक्षा करते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए और ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) पॉलिसी में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने की घोषणा की। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, परिवार का एक सदस्य पास के Max Super Speciality Hospital Saket में इलाज करा रहा था। इलाज के सिलसिले में परिवार के अन्य सदस्य होटल में ठहरे हुए थे, लेकिन आग लगने के बाद वे हादसे का शिकार हो गए। हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने B&B पॉलिसी की समीक्षा करने और इसके तहत संचालित सभी प्रतिष्ठानों की जांच कराने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि जिन इकाइयों को सीमित कमरों के संचालन की अनुमति दी गई थी, वहां क्षमता से अधिक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

विदेशी नागरिकों के शव फिलहाल परिजनों को नहीं सौंपे जाएंगे

मालवीय नगर होटल अग्निकांड में जान गंवाने वाले विदेशी नागरिकों के शव फिलहाल उनके परिजनों को नहीं सौंपे जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों की पहचान पूरी तरह सुनिश्चित करने के लिए पहले डीएनए प्रोफाइलिंग कराई जाएगी। जांच प्रक्रिया पूरी होने और पहचान की पुष्टि के बाद ही शव परिजनों या संबंधित देशों के दूतावासों को सौंपे जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि हादसे में कई शव बुरी तरह झुलस गए हैं, जिससे पारंपरिक तरीकों से पहचान करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने और मृतकों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए मिलान की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

प्रशासन के मुताबिक, सभी शवों को सुरक्षित रखा गया है और आवश्यक कानूनी व फोरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। डीएनए नमूने एकत्र कर विशेषज्ञ जांच के लिए भेजे गए हैं। पहचान की पुष्टि होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस इस मामले में Ministry of External Affairs (विदेश मंत्रालय) के लगातार संपर्क में है। साथ ही संबंधित देशों के दूतावासों को भी घटना और पहचान प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है, ताकि मृतकों के परिजनों तक सूचना पहुंचाई जा सके और आगे की औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।

10 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साकेत स्थित Max Super Speciality Hospital Saket का दौरा कर घायलों का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात कर घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया तथा उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने अस्पताल के डॉक्टरों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घायलों के उपचार की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी घायलों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और इलाज में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाए।

दिल्ली सरकार ने हादसे के पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता का भी ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निकांड में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। वहीं गंभीर रूप से घायल लोगों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पताल प्रशासन के साथ समन्वय कर घायलों के उपचार और चिकित्सा खर्च की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी भी मरीज या उसके परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

कई कमरों में मिले इलेक्ट्रॉनिक चूल्हे

दमकल विभाग को जांच के दौरान होटल के कई कमरों में इलेक्ट्रॉनिक चूल्हे (इंडक्शन/हॉट प्लेट) और अन्य विद्युत उपकरण मिले हैं। बताया जा रहा है कि लंबे समय से ठहरे कुछ लोग अपने कमरे में ही भोजन तैयार करने के लिए इन उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह भी पड़ताल कर रही हैं कि भवन के भीतर बड़ी संख्या में उपयोग किए जा रहे विद्युत उपकरणों का आग की घटना से कोई संबंध था या नहीं। हालांकि, आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश लोगों की मौत धुएं और जहरीली गैसों के कारण दम घुटने से हुई है। आग लगने के बाद इमारत में तेजी से धुआं भर गया था, जिससे ऊपरी मंजिलों पर मौजूद कई लोग बाहर नहीं निकल सके। जांच में यह भी सामने आया है कि भवन में निकासी के सीमित रास्ते, बंद खिड़कियां और सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के कारण राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुआ। दमकल कर्मियों को अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए कई जगहों पर खिड़कियां और अन्य अवरोध तोड़ने पड़े।

घटनास्थल पहुंचेगी FSL टीम

फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम एक बार फिर घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। अधिकारियों के अनुसार, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के विशेषज्ञ आज होटल पहुंचकर विस्तृत जांच करेंगे और आग लगने के कारणों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने का प्रयास करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को FSL टीम सीमित समय और परिस्थितियों के कारण होटल के केवल एक फ्लोर की ही जांच कर पाई थी। ऐसे में आज टीम इमारत के अन्य हिस्सों का भी बारीकी से निरीक्षण करेगी, ताकि आग की शुरुआत, उसके फैलने की दिशा और संभावित कारणों का पता लगाया जा सके। जांच एजेंसियों के अनुसार, अग्निकांड में जान गंवाने वालों में वे लोग भी शामिल थे जो हादसे के समय तीसरी मंजिल और बेसमेंट में मौजूद थे। इसी वजह से फॉरेंसिक टीम इन दोनों हिस्सों पर विशेष ध्यान दे सकती है। विशेषज्ञ यह भी जांच करेंगे कि आग और धुएं का प्रभाव भवन के अलग-अलग हिस्सों में किस तरह फैला और किन परिस्थितियों में लोगों की जान गई।

फायर विभाग के पास कभी नहीं आई फाइल, पूर्व DFS निदेशक का बड़ा दावा

मालवीय नगर होटल अग्निकांड की जांच के बीच दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के पूर्व निदेशक अतुल गर्ग ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि संबंधित भवन की फाइल कभी भी फायर विभाग के पास नहीं भेजी गई, इसलिए न तो कोई अग्नि सुरक्षा निरीक्षण किया गया और न ही फायर NOC (अनापत्ति प्रमाणपत्र) जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। फायर विभाग किसी भी भवन को स्वतः एनओसी जारी नहीं करता। इसके लिए संबंधित फाइल पहले नगर निकायों या अन्य सक्षम एजेंसियों के माध्यम से विभाग के पास भेजी जाती है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामले आमतौर पर MCD, NDMC, DDA या अन्य सरकारी एजेंसियों की ओर से फायर विभाग को भेजे जाते हैं।

उन्होंने कहा कि फाइल प्राप्त होने के बाद फायर विभाग परिसर का निरीक्षण करता है और यह निर्धारित करता है कि वहां कौन-कौन से अग्नि सुरक्षा इंतजाम आवश्यक हैं तथा संचालन शुरू होने से पहले कौन से फायर सेफ्टी उपकरण लगाए जाने चाहिए। लेकिन इस मामले में न तो भवन संचालकों की ओर से आवेदन किया गया और न ही संबंधित एजेंसी ने मामला फायर विभाग को अग्रेषित किया। पूर्व DFS प्रमुख के मुताबिक, लाइसेंस जारी करने की प्राथमिक जिम्मेदारी फायर विभाग की नहीं होती, बल्कि संबंधित नगर निकायों की होती है। फायर विभाग की भूमिका केवल सुरक्षा मानकों पर तकनीकी राय देने और आवश्यक अग्नि सुरक्षा उपायों की पुष्टि करने तक सीमित रहती है।

सरकार ने पिछले हफ्ते ही होम-स्टे पॉलिसी के ड्राफ्ट पर मांगे सुझाव

मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद दिल्ली सरकार की प्रस्तावित होम-स्टे पॉलिसी भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने पिछले सप्ताह ही इस नीति के मसौदे (ड्राफ्ट) पर लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे थे, लेकिन ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के महज 10 दिन के भीतर ही यह योजना सवालों के घेरे में आ गई है। प्रस्तावित नीति के तहत सरकार Airbnb मॉडल जैसी व्यवस्था को औपचारिक मान्यता देने की तैयारी कर रही थी। इसका उद्देश्य घर मालिकों को अपने खाली कमरों में पर्यटकों को ठहराने की अनुमति देना था, ताकि वे कानूनी रूप से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। प्रस्ताव के अनुसार, इस योजना के तहत जारी लाइसेंस की वैधता पांच वर्ष रखने का सुझाव दिया गया था।

सरकार का मानना था कि इस नीति से राजधानी में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, होटलों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा और आम लोगों को आय का नया स्रोत मिलेगा। साथ ही पर्यटकों को अपेक्षाकृत कम लागत पर स्थानीय परिवेश का अनुभव करने का अवसर भी मिल सकेगा। हालांकि, ड्राफ्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि होम-स्टे या B&B इकाइयों को होटल, गेस्ट हाउस या लॉज की तरह संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा किसी भी आवासीय संपत्ति को पूरी तरह व्यावसायिक प्रतिष्ठान में बदलने पर रोक का प्रस्ताव था। नीति में यह भी सुनिश्चित करने की बात कही गई थी कि रिहायशी इलाकों की शांति, सुरक्षा और सामान्य जीवन प्रभावित न हो।

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