कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में फर्जी सर्टिफिकेट के नाम पर पुलिस नौकरी लेने का मामला सामने आया है। सब इंस्पेक्टर (SI) अमिताभ प्रताप सिंह उर्फ अमिताभ थियोफिलस जाली प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी का लाभ लेता रहा। हैरानी की बात यह है कि इसकी सच्चाई पता करने में विभाग को 28 साल लग गए।
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दरअसल, भोपाल की एक महिला ने SI अमिताभ प्रताप सिंह पर फर्जी दस्तावेज के जरिए नौकरी हासिल करने की शिकायत की थी। जिसके अनुसार आरोपी SI ने 1998 में गोंड अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल की थी। रांझी एसडीएम की जांच रिपोर्ट के बाद राज्य की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने कठोर कदम उठाते हुए जाति प्रमाण पत्र अमान्य घोषित कर दिया।
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इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। वहीं कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं। क्या नौकरी से पहले दस्तावेजों का सही से सत्यापन नहीं कराया गया था ? अगर पुलिस विभाग में ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी ली जाती है तो बाकी विभागों का क्या हाल होगा?
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