० मंडी में दिख रहा सियासी मेला
कृष्ण कुमार सैनी , चंडीगढ़। बीते कुछ दिनों से हरियाणा के दिग्गज नेता मंडियों की धूल फांकते नजर आ रहे हैं। चिलचिलाती गर्मी भी इन्हें रोक नहीं पा रही। हाल ये है कि एक मंडी से दूसरी मंडी तक नेताओं के लगातार दौरे जारी हैं। खास बात ये है कि ये सिलसिला किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य की चारों बड़ी पार्टियों के नेता मंडियों में ही डेरा डाले हुए हैं।
असल वजह क्या है?
मंडियों में अचानक बढ़ी इस हलचल के पीछे वजह है खरीद की “नई व्यवस्था”। नेता खुद ग्राउंड पर जाकर ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि खरीद प्रक्रिया सही ढंग से चल रही है या नहीं। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या सब कुछ ठीक है या फिर किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आखिर क्या हैं नए नियम?
सरकार ने इस बार खरीद प्रक्रिया को लेकर कुछ नए नियम लागू किए हैं। मंडी में एंट्री के लिए गेट पास, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और ट्रैक्टर/वाहन का रजिस्ट्रेशन व फोटो अनिवार्य किया गया है। कुल मिलाकर प्रशासन ने तीन-स्तरीय वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया है, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके।
किसानों का क्या कहना है?
किसानों का कहना है कि नए नियमों के बाद प्रक्रिया पहले के मुकाबले धीमी हो गई है। जहां पहले कुछ घंटों में ही फसल बेचकर घर लौट जाते थे, अब कितना समय लगेगा ये तय करना मुश्किल हो रहा है। कई किसानों को बार-बार मंडी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
विपक्ष ने क्या कहा?
कांग्रेस, जेजेपी और इनेलो—तीनों विपक्षी पार्टियों के नेता इन नियमों को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी बढ़ा रही है। विपक्ष ने इन नियमों को वापस लेने की मांग भी उठाई है।
सरकार का पक्ष
वहीं सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक खुद मंडियों का दौरा कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि ये सभी बदलाव पारदर्शिता लाने और सिस्टम को मजबूत करने के लिए किए गए हैं। साथ ही दावा किया जा रहा है कि किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
सौ टके का सवाल
फिलहाल हालात ऐसे हैं कि अगर किसी नेता से मिलना हो, तो सबसे आसान जगह मंडी बन चुकी है। हर मंडी में रोज कोई न कोई बड़ा चेहरा नजर आ रहा है। अब देखना ये होगा कि ये दौरे सिर्फ दिखावे तक सीमित रहते हैं या जमीन पर हालात भी बदलते हैं।

