कर्नाटक सरकार में मंत्री बी नागेंद्र ने शुक्रवार, 28 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. मंत्री पद संभालने के महज 25 दिन बाद उन्होंने यह फैसला लिया. भाजपा के लगातार हमलों और वाल्मीकि कॉरपोरेशन घोटाले के आरोपों के दबाव में उन्होंने यह कदम उठाया. राज्य की एक कल्याणकारी संस्था के फंड में कथित गड़बड़ी के मामले को लेकर विपक्ष लगातार उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था.

यह दूसरी बार है जब उन्होंने इस्तीफा दिया है. मतलब घोटाला एक और इस्तीफा दो बार. महज 25 दिन पहले ही उन्हें योजना और सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी मिली थी. 

मंत्री बी नागेंद्र ने शुक्रवार को डीके शिवकुमार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. नागेंद्र को 3 अगस्त को कैबिनेट विस्तार के दौरान दोबारा मंत्री बनाया गया था और उन्होंने महज 25 दिन बाद पद छोड़ दिया. इस दौरान वह काफी भावुक नजर आए और उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े. उन्होंने कहा कि वह निर्दोष हैं और विपक्ष द्वारा उन्हें बेवजह निशाना बनाया गया है.

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भाजपा की ओर से उन पर लगातार हमले हो रहे थे, इन्हीं आरोपों के चलते उन्हें दो साल पहले भी इस्तीफा देना पड़ा था. शुक्रवार को विधान सौधा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बी नागेंद्र ने बताया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है.

बी नागेंद्र ने कहा कि विपक्षी दल द्वारा मेरे खिलाफ लगाए गए अनावश्यक आरोपों के कारण मेरी पार्टी को जो शर्मिंदगी उठानी पड़ सकती है, उससे बचने के लिए मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हूं.

मई 2023 में नागेंद्र पहली बार मंत्री बने थे.  उन्हें अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग का प्रभार मिला था और वे वाल्मीकि कॉरपोरेशन से जुड़े थे और कॉरपोरेशन के अकाउंट्स ऑफिसर चंद्रशेखरन पी ने अपने सुसाइड नोट में 89.63 करोड़ रुपये के अनधिकृत ट्रांसफर का आरोप था. चार बार के विधायक नागेंद्र को शिवकुमार ने योजना और सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी थी.

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