हेमंत शर्मा, इंदौर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं और केंद्र सरकार के कामकाज का जिक्र करते हुए मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऐसी स्थिति में फंस गए, जिसने पूरे बयान को चर्चा में ला दिया। मंत्री विजयवर्गीय प्रधानमंत्री की उस योजना की खूबियां गिना रहे थे, जिसके जरिए ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों को उनकी संपत्ति का अधिकार देने की बात कही जाती है, लेकिन योजना का नाम बताते वक्त मंत्री खुद अटक गए। 

कैलाश विजयवर्गीय ने योजना को “बहुत बड़ी योजना” और “बहुत बड़ा संकल्प” बताते हुए उसका उद्देश्य समझाया, लेकिन नाम बोलने में उन्हें मदद लेनी पड़ी। पास बैठे पूर्व विधायक जीतू जी ने योजना का नाम बताया—स्वामित्व योजना। यानी जिस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल बताते हुए मंत्री उसकी उपलब्धियां गिना रहे थे, उसी योजना का नाम कुछ क्षणों के लिए उनकी जुबान से गायब हो गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार का बड़ा संकल्प रहा है कि गरीब के पास अपना मकान हो। 

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए कहा कि चार करोड़ से ज्यादा मकान गरीबों के लिए बनाए गए हैं। इसके बाद विजयवर्गीय ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों की बात उठाई, जो वर्षों से एक ही जगह पर रह रहे हैं, लेकिन उनके पास अपनी जमीन का अधिकार या पट्टा नहीं था।उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से जब ऐसी आवाज उठी तो प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों को निर्देश दिए और इसके बाद लोगों को उनकी संपत्ति पर अधिकार देने के लिए योजना लाई गई।

योजना का नाम भूलना बना चर्चा का विषय

यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी खास हो गया क्योंकि विजयवर्गीय खुद प्रधानमंत्री की योजनाओं का जिक्र कर रहे थे। वह योजना की उपलब्धियां और उससे मिलने वाले अधिकारों को लेकर सरकार की बात जनता के सामने रख रहे थे।लेकिन जिस योजना को वह गरीबों के लिए बड़ा कदम बता रहे थे, उसका नाम बताने के दौरान उन्हें पास बैठे नेता की मदद लेनी पड़ी।अब सियासी सवाल यही है कि जब प्रधानमंत्री की योजनाओं का बखान करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस हो और उसी दौरान योजना का नाम ही याद दिलाना पड़े, तो विपक्ष को सरकार पर तंज कसने का मौका तो मिलेगा ही।

40 साल से रह रहे, लेकिन अधिकार नहीं’- विजयवर्गीय ने बताया योजना का उद्देश्य

विजयवर्गीय ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में कई परिवार ऐसे हैं जो दशकों से एक ही जगह रह रहे हैं, लेकिन उनके पास अपनी संपत्ति का वैधानिक रिकॉर्ड नहीं था।उनके मुताबिक स्वामित्व योजना के माध्यम से ऐसे पात्र लोगों को उनके कब्जे वाली ग्रामीण आवासीय संपत्ति से संबंधित अधिकारों का रिकॉर्ड देने की दिशा में काम किया जा रहा है।केंद्र सरकार के अनुसार स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को उनके अधिकारों का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है। इसमें ड्रोन आधारित सर्वे और आधुनिक तकनीक के जरिए संपत्ति की मैपिंग की जाती है।

अब इसी योजना का बड़ा कार्यक्रम इंदौर में

जिस योजना का नाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में याद दिलाना पड़ा, अब उसी स्वामित्व योजना के राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन इंदौर आने वाले हैं।17 सितंबर को इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण आबादी क्षेत्र के पात्र हितग्राहियों को मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज सांकेतिक रूप से सौंपे जाने की तैयारी है। कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस स्तर पर भी तैयारियां की जा रही हैं।मध्यप्रदेश सरकार ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन और पंजीयन अभियान चलाने की तैयारी की है। सरकार के मुताबिक इस अभियान से 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

विजयवर्गीय का दावा- आजादी के बाद गरीबों के लिए इतना बड़ा काम नहीं हुआ

कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बयान में स्वामित्व योजना को बेहद बड़ा कदम बताते हुए दावा किया कि स्वतंत्रता के बाद गरीबों के लिए किसी सरकार ने इतना बड़ा काम नहीं किया, जितना मौजूदा डबल इंजन सरकार कर रही है।उनका कहना था कि जो लोग वर्षों से जमीन पर रह रहे थे लेकिन उनके पास अधिकार नहीं था, उन्हें उसी स्थान पर स्वामित्व देने का काम किया जा रहा है।सरकार की ओर से इस योजना को ग्रामीण परिवारों की संपत्ति को औपचारिक रिकॉर्ड से जोड़ने और उनके संपत्ति अधिकारों को मजबूत करने की पहल के तौर पर पेश किया जा रहा है।

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