रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार ने युवाओं का भरोसा और विश्वास कायम रखने के लिए परीक्षाओं के मामले में कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि JSSC CGL में गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी के साथ अन्याय करना नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और युवाओं का विश्वास बनाए रखना है।
नियुक्ति रद्द होने से प्रभावित कर्मी जा सकते हैं कोर्ट
JSSC CGL के माध्यम से चयनित होकर सरकारी सेवा में योगदान दे चुके कर्मचारियों की नियुक्ति रद्द होने के सवाल पर सुदिव्य सोनू ने कहा कि प्रभावित कर्मचारियों के लिए न्यायालय का रास्ता खुला हुआ है।
उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में पूरे मामले की समीक्षा होगी और उसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार की कार्रवाई सही थी या गलत। यानी नियुक्ति रद्द होने के बाद प्रभावित कर्मचारियों के पास कानूनी चुनौती देने का विकल्प मौजूद है।
परीक्षा एजेंसियों का बने नेशनल रजिस्टर
परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों को लेकर मंत्री ने देशभर में नेशनल रजिस्टर बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस रजिस्टर में किसी भी राज्य में ब्लैकलिस्ट की गई परीक्षा एजेंसियों की पूरी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।
उनके मुताबिक, इससे किसी राज्य में प्रतिबंधित या ब्लैकलिस्टेड एजेंसी दूसरे राज्य में परीक्षा आयोजित नहीं कर सकेगी। परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए परीक्षा एजेंसियों की विश्वसनीयता पहले ही जांचने वाली व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
TDPL की भूमिका पर जांच के बाद कार्रवाई
TDPL से जुड़ी कथित गड़बड़ियों पर मंत्री ने कहा कि सरकार को कंपनी के संबंध में जानकारी मिली थी। इसके बाद CID ने छापेमारी और जांच की, जिसमें कई तथ्य सामने आए।
इसके बाद यह सवाल उठा कि TDPL ने जिन-जिन परीक्षाओं का संचालन किया है, क्या उन सभी की भी जांच होनी चाहिए। इसी आधार पर संबंधित परीक्षाओं और नियुक्तियों की समीक्षा एवं जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।
CBI जांच की मांग पर बोले- हो रही राजनीति
JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान उठी CBI जांच की मांग पर मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों की प्रमुख मांग JSSC CGL को रद्द करने की थी और सरकार ने युवाओं के विश्वास को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में कार्रवाई की।
हालांकि, आंदोलनकारी छात्र CBI जांच की मांग पर लगातार जोर देते रहे हैं। ऐसे में सरकार और अभ्यर्थियों के बीच यह मुद्दा अभी पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।
आगे नियुक्तियों पर भी पड़ सकता है असर
विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की जांच और नियुक्तियों को लेकर जारी विवाद के असर पर सुदिव्य सोनू ने कहा कि परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन सरकार स्थिति को बेहतर करने का प्रयास करेगी। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के भरोसे को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

