दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। कानून का खौफ कागजों में, और रेत माफिया का राज सड़कों पर। नर्मदापुरम में बुधवार की रात कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जिले के प्रभारी और पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने दिन में सीना ठोककर मीडिया के सामने बड़े-बड़े दावे किए थे“ना जर्जर तवा पुल से भारी वाहन गुजरेंगे, ना ही नर्मदा का सीना चीरकर अवैध रेत निकाली जाएगी!”
लेकिन मंत्रीजी का काफिला जिले की सरहद से बाहर क्या निकला, उनके वादों और प्रशासनिक दावों का जनाज़ा निकल गया! मंत्रीजी की गाड़ी की धूल भी ठंडी नहीं हुई थी कि रात के अंधेरे में तवा पुल पर डंपरों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई और नर्मदा नदी में रेत माफिया का ‘ऑपरेशन रात’ धड़ल्ले से चालू हो गया।
जर्जर पुल, 25 टन की लिमिट और ‘दबंग’ डंपर
नर्मदापुरम को माखननगर, पिपरिया और पचमढ़ी से जोड़ने वाला ऐतिहासिक तवा पुल जून महीने से ही सांसें गिन रहा है। सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने साफ आदेश दिया था 25 टन से ज्यादा वजनी गाड़ी दिखी तो नो-एंट्री! सुरक्षा के नाम पर पुल के दोनों छोरों पर पुलिस का पहरा बिठाया गया, सीसीटीवी कैमरे टांगे गए और कर्मचारियों की फौज खड़ी की गई। लेकिन नतीजा? रात होते ही नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए ओवरलोडेड भारी-भरकम डंपर और ट्रक पुल के ऊपर से ऐसे गुजरे, मानो प्रशासन को मुंह चिढ़ा रहे हों। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि”पुल पर खाकी का पहरा सिर्फ आम जनता को डराने के लिए है, रसूखदारों और माफिया के डंपरों के लिए तो रेड कार्पेट बिछा दिया जाता है!”
नाली भी खुदी, फिर भी गुजरी ट्रॉली! नर्मदा से अवैध खनन जारी
अवैध उत्खनन रोकने के नाम पर प्रशासन की ‘कार्रवाई’ भी किसी कॉमेडी सर्कस से कम नहीं रही। बुधनी रोड पर नर्मदा नदी के तटों तक रेत माफिया ना पहुंचे, इसके लिए प्रशासन ने रास्तों पर गहरी नालियां खुदवा दी थीं। लेकिन रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि इन नालियों को लांघकर रात के सन्नाटे में दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खदानों में उतरीं और सुबह होने तक रेत का काला कारोबार चलता रहा। मंत्रीजी के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे पर माफिया का यह सीधा तमाचा है!
फाइल में बंद ‘हाइटगेज’ और अफसरों की लचर दलीलें
पुल पर भारी गाड़ियों को रोकने का सबसे पक्का इलाज था हाइटगेज लगाना। मोहासा इंडस्ट्रियल एरिया और फोरलेन काम के कारण भारी गाड़ियां यहां से लगातार गुजरती हैं, इसलिए हाइटगेज बेहद जरूरी था। लेकिन हकीकत यह है कि हाइटगेज की ड्राइंग और डिजाइन की फाइल महीनों से भोपाल में बड़े अफसरों की टेबल पर ‘धूल फांक’ रही है। फाइल पास होगी, मंजूरी मिलेगी, तब कहीं जाकर हाइटगेज लगेगा… तब तक पुल बचे या टूटे, किसी को क्या फर्क पड़ता है!
MPRDC का वही घिसा-पिटा जवाब: “कार्रवाई करेंगे
पूरे मामले पर जब मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) के महाप्रबंधक अनिरुद्ध बंसल से सवाल किया गया, तो वही रटा-रटाया बयान सामने आया”तवा पुल पर भारी वाहन प्रतिबंधित हैं। सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है। कुछ ड्राइवर जबरदस्ती गाड़ी घुसा रहे हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। हाइटगेज की मंजूरी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।” बड़ा सवाल तो यह है कि जब भारी सुरक्षा, पुलिस बल और सीसीटीवी लगे हैं, तो ड्राइवर आखिर ‘जबरदस्ती’ पुल पार कैसे कर रहे हैं? क्या प्रशासन सिर्फ किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
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