Business Desk – Income Tax Return : अगर आप 31 जुलाई 2026 तक अपना Income Tax Return (ITR) फाइल नहीं कर पाए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप अब भी 31 दिसंबर 2026 तक Belated Return दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको लेट फीस (Penalty) और बकाया टैक्स पर ब्याज (Interest) देना पड़ सकता है।

वहीं, कुछ टैक्सपेयर्स ऐसे भी हैं, जो 31 अगस्त तक बिना किसी लेट फीस के ITR फाइल कर सकते हैं। इसके अलावा अगस्त में होने वाली RBI Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक भी आपकी EMI पर असर डाल सकती है।
31 जुलाई की डेडलाइन निकल गई, अब क्या विकल्प हैं?
ITR-1 और ITR-2 फॉर्म से रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई थी। अगर आप इस समय-सीमा तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए हैं, तो अब 31 दिसंबर 2026 तक Belated Return फाइल कर सकते हैं।
हालांकि, देरी से रिटर्न भरने पर लेट फीस के साथ बकाया टैक्स पर Income Tax Act की Section 234A के तहत ब्याज भी देना होगा। ऐसे मामलों में टैक्स रिफंड आने में भी सामान्य से ज्यादा समय लग सकता है।
कितना लगेगा जुर्माना?
अगर आपकी सालाना आय 5 लाख रुपए से ज्यादा है, तो Belated Return दाखिल करने पर 5,000 रुपए की लेट फीस देनी होगी। वहीं, 5 लाख रुपए तक सालाना आय वाले टैक्सपेयर्स को 1,000 रुपए की लेट फीस चुकानी होगी। यदि टैक्स बकाया है, तो उस पर अलग से ब्याज भी लगेगा।
किन लोगों को 31 अगस्त तक राहत?
जिन टैक्सपेयर्स को ITR-3 या ITR-4 फॉर्म भरना होता है और जिनका Tax Audit जरूरी नहीं है, वे 31 अगस्त 2026 तक बिना किसी लेट फीस के रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
इस श्रेणी में Self-employed Professionals, Freelancers, छोटे कारोबारी और Section 44AD व 44ADA के तहत Presumptive Taxation Scheme चुनने वाले टैक्सपेयर्स शामिल हैं।
ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 में अंतर
ITR-1 (Sahaj) मुख्य रूप से वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए है। ITR-2 उन लोगों के लिए होता है, जिनकी आय Salary के अलावा Capital Gain या अन्य स्रोतों से होती है, लेकिन Business Income नहीं होती।
ITR-3 बिजनेस या प्रोफेशन से आय अर्जित करने वालों के लिए है, जबकि ITR-4 (Sugam) छोटे कारोबारियों और Presumptive Taxation Scheme अपनाने वाले टैक्सपेयर्स के लिए होता है।
लेट ITR फाइल करने का क्या असर होगा?
समय-सीमा के बाद ITR दाखिल करने पर सिर्फ जुर्माना ही नहीं लगता, बल्कि टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है। अगर कोई टैक्स बकाया है, तो उस पर ब्याज भी देना होगा। इसलिए विशेषज्ञ समय रहते Belated Return दाखिल करने की सलाह देते हैं।
RBI की बैठक पर भी रहेगी नजर
अगस्त में Reserve Bank of India (RBI) की Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक 3 से 5 अगस्त तक होगी और इसके फैसलों का ऐलान 5 अगस्त को किया जाएगा।
अगर RBI रेपो रेट में बदलाव करता है, तो उसका असर Home Loan, Car Loan, Personal Loan की EMI और FD की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल इस बैठक में रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है।


