दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा कर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि जनसेवा से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें यह वीडियो कई लोगों ने टैग कर भेजा था। वीडियो देखने के बाद उन्होंने संबंधित मामले पर संज्ञान लिया और कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में देरी या लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही या गैर-जिम्मेदाराना रवैया स्वीकार नहीं किया जाएगा। सीएम द्वारा साझा किया गया वीडियो एक जन औषधि केंद्र का बताया जा रहा है। वीडियो में केंद्र के कुछ कर्मचारी काउंटर से दूर खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि दवाई लेने आए लोगों को कथित तौर पर पोछा लगाने का हवाला देकर करीब आधे घंटे तक इंतजार कराया जा रहा था।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उन्हें यह वीडियो कई लोगों ने टैग किया था, जिसके बाद उन्होंने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता को सेवाएं उपलब्ध कराने में लापरवाही या असंवेदनशील व्यवहार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि जनहित से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाएगी और शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार नागरिकों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

दवाई लेने पहुंचे एक व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में वह कर्मचारियों से देरी और लोगों को रोके रखने को लेकर सवाल करता दिखाई देता है। इस दौरान कुछ कर्मचारी कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाई देते हैं, “वीडियो जहां मर्जी भेज देना।”

दरअसल, जन औषधि केंद्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें दवाई लेने आए लोगों को कथित तौर पर पोछा लगाने का हवाला देकर लंबे समय तक इंतजार कराया जा रहा था। वीडियो में कुछ कर्मचारी यह कहते हुए भी सुनाई दे रहे हैं कि “वीडियो जहां मर्जी भेज देना।” इसके बाद कई लोगों ने इस वीडियो को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को टैग किया। वीडियो पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं इसे अपने एक्स हैंडल पर साझा किया और सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “पब्लिक सर्विस में इस तरह का व्यवहार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा। इनके खिलाफ एक्शन होगा और इस वेंडर का लाइसेंस कैंसिल होगा। एक तरफ हम लोग इतना काम कर रहे हैं कि राइट टू सर्विस बिल लेकर आ रहे हैं, ताकि अधिकारियों को काम करना ही पड़े और लोगों को समय पर सेवाएं मिल सकें।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आप दवाई जैसी जरूरी चीज देने से इनकार कर रहे हैं कि पोछा लग रहा है। ऐसा व्यवहार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा। किसी भी सरकारी अस्पताल में ऐसा नहीं होना चाहिए। केवल अस्पताल ही नहीं, किसी भी पब्लिक सर्विस में इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।” रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि जनता की आवाज और जन पत्रकारिता प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “जरूरी नहीं कि कोई शिकायत केवल प्रशासनिक माध्यमों से ही मेरे पास पहुंचे। आम लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दे और जन पत्रकारिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकार ऐसी शिकायतों पर भी गंभीरता से कार्रवाई करेगी।”

राइट टू सर्विस बिल का जिक्र कर CM ने दिया संदेश

जन औषधि केंद्र के वायरल वीडियो पर सख्त रुख अपनाने के साथ ही दिल्ली की मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के हालिया ‘राइट टू सर्विस’ कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था बना रही है, जिसमें नागरिकों को तय समय-सीमा के भीतर सरकारी सेवाएं प्राप्त करना कानूनी अधिकार होगा। दरअसल, दिल्ली सरकार ने पिछले महीने नागरिकों को निर्धारित समय में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने को कानूनी अधिकार बनाने संबंधी विधेयक को मंजूरी दी थी। इस कानून का उद्देश्य सरकारी सेवाओं में जवाबदेही बढ़ाना और अनावश्यक देरी पर रोक लगाना है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई अधिकारी बिना किसी उचित और ठोस कारण के निर्धारित समय में सेवा उपलब्ध नहीं कराता है, तो उस पर प्रतिदिन 250 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। इस दंड की अधिकतम सीमा 5,000 रुपये निर्धारित की गई है। हालांकि, किसी अधिकारी पर जुर्माना लगाने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाएगा और देरी के कारणों की जांच की जाएगी। इसके बाद ही दंडात्मक कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा।

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