सोहराब आलम, मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) कार्यालय के अंतर्गत कार्यरत आवास सहायकों, आवास कार्यपालक सहायकों और अन्य डीआरडीए कर्मियों का पिछले कई महीनों से मानदेय भुगतान नहीं हुआ है। लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मियों में भारी रोष व्याप्त है। अपनी जायज मांगों को लेकर अब इन कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने का निर्णय लिया है।
डीआरडीए कार्यालय के समक्ष किया जोरदार प्रदर्शन
लंबित मानदेय और वेतन भुगतान की मांग को लेकर मंगलवार को सैकड़ों की संख्या में आवास सहायक और डीआरडीए कर्मी जिला मुख्यालय स्थित डीआरडीए कार्यालय के समक्ष एकत्रित हुए। कर्मियों ने यहां जोरदार विरोध-प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने उप विकास आयुक्त (DDC) को ज्ञापन सौंपकर पिछले कई महीनों से रुके पड़े मानदेय का शीघ्र भुगतान करने की पुरजोर मांग की।
विभिन्न पदों के हिसाब से महीनों से अटका है वेतन
आवास सहायक संघ के जिलाध्यक्ष प्रकाश कुमार तिवारी ने इस गंभीर मुद्दे पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग की उदासीनता के कारण विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मियों को भारी आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है:
- डीआरडीए कर्मी: पिछले 8 महीनों से मानदेय बकाया है।
- आवास कार्यपालक सहायक: पिछले 6 महीनों से वेतन से वंचित हैं।
- ग्रामीण आवास पर्यवेक्षक, लेखापाल और आवास सहायक: पिछले 5 महीनों से मानदेय लंबित है।
जिलाध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि ये कर्मी सरकार की बेहद महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ को धरातल पर उतारने और उसे सफल बनाने में अपनी रीढ़ की हड्डी जैसी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद इन्हें समय पर मेहनताना नहीं मिल रहा है।
दिवाली और छठ जैसे महापर्व पर भुखमरी की कगार पर परिवार
कर्मचारियों ने दर्द साझा करते हुए बताया कि लगातार महीनों तक वेतन न मिलने के कारण उनके और उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। वर्तमान में दीपावली और लोक आस्था का महापर्व ‘छ छठ’ सिर पर है, ऐसे में घर में खर्च चलाना और त्योहार मनाना दूभर हो गया है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने जल्द से जल्द संज्ञान लेकर बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया, तो सभी कर्मी अपने-अपने कार्य का पूर्ण बहिष्कार कर देंगे और बाध्य होकर भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।

