सोहराब आलम, मोतिहारी। पूर्वी चंपारण जिले से एक बार फिर बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को लेकर खबर सामने आई है। हरदिया पुल के एप्रोच पथ की हाल ही में कराई गई मरम्मत पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गए हैं। करोड़ों की लागत से तैयार इस महत्वपूर्ण मार्ग की स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और निर्माण विभागों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
करोड़ों की लागत और शुरुआती खामियां
पूर्वी चंपारण के हरदिया में लगभग 13 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक अत्याधुनिक आरसीसी पुल का निर्माण किया गया था। इस पुल का उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को सुगम यातायात प्रदान करना था। हालांकि, निर्माण के तुरंत बाद ही इसके एप्रोच पथ में बड़ी-बड़ी दरारें आने लगीं और सड़क का एक हिस्सा धंस गया। जब यह गंभीर मामला प्रमुखता से मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर सामने आया, तब जाकर जिला प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में एप्रोच पथ की रिपेयरिंग का काम शुरू कराया गया।
रिपेयरिंग के तुरंत बाद टूटने लगी सड़क
प्रशासन द्वारा मरम्मत कार्य पूरा कराए जाने के कुछ ही समय बाद स्थिति जस की तस या उससे भी बदतर नजर आने लगी है। एप्रोच पथ पर डाले गए कंक्रीट और अलकतरा (डामर) कई जगहों से उखड़ने और टूटने लगे हैं। इस स्थिति ने स्थानीय नागरिकों और आवागमन करने वाले राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लोगों के मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर मरम्मत के दौरान किस निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया था और किस लापरवाह तरीके से सड़क को दुरुस्त किया गया, जो इतने कम समय में ही जवाब दे गई।
राजनीतिक गलियारों में गरमाया मामला
सड़क की इस लचर हालत को लेकर अब यह मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है और विपक्ष के तीखे निशाने पर आ गया है। पूर्व विधायक और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राम ने इस पुल निर्माण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और विभागीय उदासीनता का खुला आरोप लगाया है।
उन्होंने तीखे शब्दों में मांग की है कि केवल लीपापोती करने से काम नहीं चलेगा। जो एप्रोच पथ पूरी तरह खराब हो चुका है, उसे दोबारा पूरी तरह तोड़कर पूरी पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के मानकों के तहत नया एप्रोच पथ बनाया जाना चाहिए।
स्थायी समाधान की जरूरत या सिर्फ खानापूर्ति?
वर्तमान स्थिति यह है कि जनता और विपक्ष दोनों के मन में एक ही मुख्य सवाल गूंज रहा है। क्या केवल सतही रिपेयरिंग और लीपापोती से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान संभव हो पाएगा? या फिर प्रशासन को उच्चस्तरीय तकनीकी टीम भेजकर एप्रोच पथ की गुणवत्ता की गहराई से दोबारा जांच करवानी चाहिए ताकि जनता के टैक्स के पैसों का सही सदुपयोग हो सके और एक स्थायी समाधान निकल सके।



