सोहराब आलम, मोतिहारी। बिहार में पुलिस व्यवस्था को जनता के अनुकूल यानी पीपुल फ्रेंडली बनाने के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद खाकी का एक ऐसा क्रूर और अमानवीय चेहरा सामने आया है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है। पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले के चिरैया थाना परिसर से पुलिस की दबंगई का एक सनसनीखेज मामला आया है।

​थाना परिसर बना अखाड़ा

​मिली जानकारी के अनुसार, चिरैया थाने में तैनात अपर थानाध्यक्ष सह सब-इंस्पेक्टर (SI) मधुकर कुमार पर एक व्यक्ति के साथ बर्बर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर वायरल हो रही तस्वीरों व वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे एसआई मधुकर कुमार थाना परिसर के भीतर ही एक युवक पर लाठियां बरसा रहे हैं।
​बताया जा रहा है कि संबंधित युवक नशे की हालत में था और कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के सामने ही उन पर अभद्र टिप्पणियां कर रहा था। इस बात से गुस्साए एसआई मधुकर कुमार अपना आपा खो बैठे और आग बबूला होकर उन्होंने युवक की जमकर धुनाई कर दी। पिटाई के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा युवक को खुलेआम मां-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां दिए जाने की बात भी सामने आ रही है, जिससे महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

​खाकी के रवैये पर उठे बड़े सवाल

​इस घटना ने एक बार फिर कानून के रखवालों के आचरण को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस यदि खुद कानून को अपने हाथ में लेगी, तो आम नागरिकों में सुरक्षा का भाव कैसे पैदा होगा?

  • ​कानून व्यवस्था का उल्लंघन: कानून व्यवस्था बनाए रखने की शपथ लेने वाले पुलिस अधिकारियों द्वारा इस तरह सरेआम कानून हाथ में लेना निंदनीय है।
  • ​भय का माहौल: इस तरह की घटनाएं आम जनता के मन में पुलिस के प्रति डर और अविश्वास की भावना को और गहरा करती हैं।
  • ​प्रशासनिक जवाबदेही: क्या शराबी द्वारा अभद्र टिप्पणी करने पर पुलिस के पास कानून सम्मत कार्रवाई करने के बजाय मारपीट करने का अधिकार है?

​कार्रवाई की मांग और प्रशासनिक चिंता

​बिहार सरकार लगातार पुलिस बल को आधुनिक और जन-संवेदनशील बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि थाने में आने वाले हर आम नागरिक को न्याय मिल सके। परंतु, जमीनी स्तर पर ऐसे मामले इन तमाम दावों की धज्जियां उड़ा देते हैं।
​इस वायरल वीडियो और घटना के सामने आने के बाद अब स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों में भारी आक्रोश है। लोग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। देखना यह होगा कि मोतिहारी जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और खाकी की इस छवि को सुधारने के लिए क्या सख्त संदेश देता है।