हेमंत शर्मा, इंदौर। Exclusive Special Story: मध्यप्रदेश की सियासत में अब Gen Z यानी नई युवा पीढ़ी बड़ा राजनीतिक फैक्टर बनती नजर आ रही है। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। फर्क सिर्फ तरीका है- बीजेपी डिजिटल प्लेटफॉर्म और शॉर्ट वीडियो के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने की तैयारी में है, तो कांग्रेस सीधे छात्रों के बीच जाकर संवाद का रास्ता अपना रही है। ओरछा में हुई प्रदेश कार्य समिति की बैठक में भी युवाओं तक संगठन की पहुंच बढ़ाने और सोशल मीडिया के जरिए नई पीढ़ी को जोड़ने पर जोर दिए जाने की चर्चा सामने आई है। पार्टी अब पारंपरिक राजनीतिक प्रचार से आगे बढ़कर Reels, शॉर्ट वीडियो और डिजिटल कंटेंट को युवाओं तक पहुंचने का बड़ा हथियार बनाने की तैयारी में है।

बीजेपी समझ गई Gen Z की भाषा! भाषण कम, Reels और शॉर्ट वीडियो पर जोर

अब सोशल मीडिया की भूमिका और ज्यादा महत्वपूर्ण होती दिखाई दे रही है। पार्टी का फोकस खासतौर पर उन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर है, जहां युवा अपना सबसे ज्यादा समय बिताते हैं। Reels, शॉर्ट वीडियो और डिजिटल कंटेंट के जरिए सरकार की योजनाओं, संगठन की गतिविधियों और राजनीतिक संदेशों को युवाओं तक पहुंचाने की तैयारी है। सियासी तौर पर देखें तो बीजेपी की कोशिश सिर्फ युवाओं को पार्टी की विचारधारा से जोड़ने की नहीं, बल्कि Gen Z के डिजिटल स्पेस में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की है। यानी जिस पीढ़ी तक पारंपरिक पोस्टर, भाषण और रैलियों की पहुंच सीमित है, वहां अब बीजेपी मोबाइल स्क्रीन के जरिए दस्तक देने की तैयारी में है। इसके साथ ही भाजपा ने अपने नेताओं को हिदायत दी है कि अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्टिविटीज को बढ़ाएं सरकारी योजनाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डालना है और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जोड़ने का प्रयास करना है ताकि Gen Z को ज्यादा से ज्यादा जोड़ा जा सके।

कांग्रेस का सीधा दांव- छात्रों के बीच राहुल गांधी का संवाद

वहीं कांग्रेस ने युवाओं को साधने के लिए डिजिटल रणनीति के साथ-साथ सीधे छात्रों के बीच संवाद का रास्ता चुना है। 12 सितंबर को राहुल गांधी के इंदौर दौरे के दौरान ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस दौरान राहुल गांधी छात्रों से संवाद करेंगे और उनके मुद्दों को सुनने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस की रणनीति में बेरोजगारी, शिक्षा, भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे प्रमुख हो सकते हैं। यानी कांग्रेस का संदेश साफ है कि युवा सिर्फ वोटर नहीं, बल्कि सरकार और व्यवस्था से सवाल करने वाला वर्ग है।

रोजगार से शिक्षा तक… कांग्रेस युवाओं के असंतोष को राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में

कांग्रेस युवाओं के बीच बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। पार्टी की कोशिश है कि प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार के अवसर, शिक्षा व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर छात्रों और युवाओं से सीधे बातचीत की जाए। राहुल गांधी का इंदौर में छात्रों से संवाद इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कांग्रेस इस संवाद को सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय युवा मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में बदलने के प्रयास के तौर पर आगे बढ़ा सकती है।

Gen Z क्यों बन गई दोनों पार्टियों की मजबूरी?

राजनीतिक दलों की इस नई रणनीति के पीछे एक बड़ा कारण है- Gen Z की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और डिजिटल सक्रियता। यह वह पीढ़ी है, जो राजनीतिक भाषणों से ज्यादा सोशल मीडिया पर नैरेटिव देखती है, सवाल पूछती है और किसी भी मुद्दे पर कुछ ही समय में अपनी राय बना सकती है। हाल के वर्षों में युवाओं के नेतृत्व में सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों और अभियानों ने राजनीतिक दलों को यह संकेत दिया है कि नई पीढ़ी को नजरअंदाज करना अब आसान नहीं है। इसीलिए बीजेपी हो या कांग्रेस, दोनों ही पार्टियां Gen Z को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी हैं।

एक का हथियार ‘Reels’, दूसरे का ‘डायलॉग’! मुकाबला दिलचस्प

बीजेपी की रणनीति है कि युवा जहां हैं, वहीं पहुंचो और कांग्रेस की रणनीति है- युवा क्या सोच रहा है, उसके बीच जाकर सुनो। एक तरफ बीजेपी सोशल मीडिया, Reels और शॉर्ट वीडियो के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस छात्रों के बीच संवाद और उनके मुद्दों को राजनीतिक मंच देने की तैयारी में है। यह बदलाव सिर्फ प्रचार की तकनीक का बदलाव नहीं है, बल्कि मध्यप्रदेश की राजनीति में युवा वोट बैंक के महत्व बढ़ने का संकेत भी है।

2028 की तैयारी अभी से? Gen Z के लिए शुरू हुई सियासी होड़

हालांकि विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की तैयारियां बताती हैं कि युवा वोटर को लेकर अभी से रणनीति बननी शुरू हो गई है। बीजेपी प्रदेश कार्य समिति अब डिजिटल पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहा है, जबकि कांग्रेस युवाओं और छात्रों के मुद्दों को सरकार के खिलाफ राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है। यानी आने वाले समय में मध्यप्रदेश की राजनीति में मुकाबला सिर्फ मैदान की रैलियों तक सीमित नहीं रहेगा।

कौन होगा सफल ?

एक तरफ मोबाइल स्क्रीन पर बीजेपी की Reels होंगी, दूसरी तरफ छात्रों के बीच कांग्रेस का संवाद।” और इस पूरी सियासी कवायद के केंद्र में होगा- Gen Z का वोट, उसकी आवाज और उसका भविष्य। सबसे बड़ा सवाल यही है कि Gen Z को साधने में कौन सफल होगा? बीजेपी की डिजिटल पॉलिटिक्स या कांग्रेस का डायरेक्ट डायलॉग? आने वाले महीनों में दोनों पार्टियों की रणनीति और ज्यादा आक्रामक होती दिखाई दे सकती है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m