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रिश्वतखोर को सजा: तत्कालीन SDOP को 3 साल का कारावास, 2015 में लोकायुक्त ने 5 हजार घूस लेते पकड़ा था

बीडी शर्मा, दमोह। दमोह के तेंदूखेड़ा के तत्कालीन एसडीओपी जीपी शर्मा (SDOP GP Sharma) को रिश्वत लेने के आरोप में विशेष न्यायालय ने 3 साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही कोर्ट ने 20 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया है। तत्कालीन एसडीओपी शर्मा ने जमानत तस्दीक करने के लिए साल 2015 में 5 हजार रिश्वत ली थी।

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ये है पूरा मामला

दरअसल, पूरा मामला 2015 का है। फरियादी बृजपाल पटेल पिता बाबूलाल पटेल ने तत्कालीन एसडीओपी जीपी शर्मा के खिलाफ सागर लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक को शिकायती आवेदन दिया था, जिसमें उसने बताया था कि उसके बेटे अजय पटेल पर थाना जबेरा में लड़की को भगाकर ले जाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था, जिसकी जांच एसडीओपी शर्मा कर रहे थे। इस अपराध में अपने बेटे की अग्रिम जमानत दमोह न्यायालय से मंजूर कराई थी। जिसका आदेश लेकर उनके कार्यालय गया था, लेकिन उन्होंने जमानत तस्दीक करने के लिए 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं। जिसके बाद टीम ने शिकायत की सत्यापन कराया और 29 सितंबर 2015 को एसडीओपी को 5 हजार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। साथ ही पूरी कार्रवाई कर चार्टशीट न्यायालय में पेश की।

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आज विशेष न्यायालय ने इस प्रकरण पर सुनवाई करते हुए रिश्वतखोर तत्कालीन तेंदूखेडा एसडीओपी जीपी शर्मा को धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत 03 वर्ष का सश्रम कारावास और 20 हजार अर्थदंड से दंडित किया। वहीं एएसआई विजय कुमार चढ़ार को अभियोजन द्वारा दोष सिद्ध नहीं कर पाया, जिससे कोर्ट ने उसे दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक हेमंत कुमार पाण्डेय और अनंत सिंह ठाकुर द्वारा की गई।

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