कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े से संबंधित लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। HC के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत हलफनामा और प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। सीबीआई को निर्देशित किया है कि वह अगली सुनवाई तक यह स्पष्ट करे कि, अब तक की जांच में किन-किन व्यक्तियों या संस्थानों की संलिप्तता पाई गई है। साथ ही सीबीआई को यह भी बताना होगा कि दोषियों के खिलाफ अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
इंडियन नर्सिंग काउंसिल और मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को विशेष रूप से उन अधिकारियों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है, जो समय-समय पर अनुपयुक्त और मानक विहीन कॉलेजों को मान्यता देने के लिए जिम्मेदार थे। संबंधित प्रतिवादियों को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा, जिसमें स्पष्ट रूप से उन प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाइयों का विवरण हो, जो इन कॉलेजों को अवैध रूप से फलने-फूलने देने वाले अधिकारियों पर की गई हैं।
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गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका में मध्य प्रदेश में 2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। जिसमें हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई सीबीआई जांच में लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज अनुपयुक्त या कमियों से भरे पाए गए थे। इन संस्थानों में भवन, लैब, लाइब्रेरी, अनुभवी शिक्षक और 100 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की भारी कमी पायी गई थी। कई कॉलेज केवल कागजों पर चल रहे थे और कई प्रिंसिपल और शिक्षक 15-15 कॉलेजों में एक साथ कार्यरत दर्शाए गए थे।
इस मामले में याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने आवेदन पेश कर आरोप लगाया था कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले कागज़ी/अमानक कालेजों में जीएनएम कोर्स संचालित करने वाले जो 117 नर्सिंग कॉलेज सीबीआई जांच में अपात्र पाये गए थे, एमपी नर्सिंग काउंसिल उनके छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर करने के स्थान पर उन कॉलेजों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं ले रहा है। वहीं दूसरी ओर एमपी नर्सिंग काउंसिल ने आवेदन पेश कर परीक्षाओं और परिणामों की घोषणा की अनुमति मांगी। हाईकोर्ट ने दोनों आवेदन लंबित रखते हुए स्पष्ट किया कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 12 मई को होगी।
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