शिवम मिश्रा, रायपुर। “संगठन के बड़े नेताओं के सामने अपने मन की बात कह देने से मन भी हल्का हो जाता है…” दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल के इस बयान ने भाजपा की दूसरे दिन चल रही समन्वय बैठकों को चर्चा में ला दिया है। दुर्ग जिले की समीक्षा बैठक के बाद विजय बघेल ने संगठन के वरिष्ठ नेताओं के सामने खुलकर अपनी बात रखने की बात कही। हालांकि, उन्होंने सत्ता और संगठन के बीच किसी तरह के विवाद या तालमेल की कमी की चर्चाओं को सिरे से खारिज किया।
पढ़िए पूरी खबर
बता दें कि छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में लगातार दूसरे दिन मैराथन बैठकों का दौर जारी है। संगठन की ओर से अलग-अलग जिलों की समीक्षा कर आगामी कार्ययोजनाओं और संगठनात्मक मजबूती को लेकर विस्तार से मंथन किया जा रहा है। दूसरे दिन 17 जिलों की समीक्षा की जा रही है।
दुर्ग, राजनांदगांव और सक्ती जिले की समीक्षा के बाद अब रायपुर जिले की बैठक चल रही है। इसमें शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विधायक, सांसद, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी और प्रभारी मंत्री शामिल हैं।
बैठकों में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल, संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और आगामी कार्ययोजनाओं को लेकर चर्चा हो रही है। क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और संगठन मंत्री पवन साय एक-एक जिले की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। इस दौरान संगठन की गतिविधियों, स्थानीय स्तर की चुनौतियों और जनप्रतिनिधियों से मिले फीडबैक पर भी चर्चा की जा रही है।
विजय बघेल बोले- खुलकर हुई सभी मुद्दों पर बात
दुर्ग जिले की समीक्षा बैठक को लेकर विजय बघेल ने कहा कि जिले की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सभी समस्याओं और विषयों पर खुलकर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि संगठन के बड़े नेताओं के सामने अपने मन की बात कह देने से मन भी हल्का हो जाता है। सत्ता और संगठन के बीच तालमेल को लेकर उठ रही चर्चाओं पर विजय बघेल ने कहा कि आपसी विवाद या सत्ता-संगठन के बीच तालमेल नहीं बनने जैसी कोई बात नहीं है। बैठक में सभी विषयों पर खुलकर चर्चा हुई और संगठन को मजबूत बनाने को लेकर आगे की रणनीति पर मंथन किया गया।
क्षेत्रीय संगठन महामंत्री और प्रदेश संगठन महामंत्री ने लिया फीडबैक
BJP समन्वय बैठक के पहले दिन 16 जिलों की रिपोर्ट संगठन के सामने रखी गई। क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने प्रत्येक जिले के प्रभारी मंत्री के साथ जिलाध्यक्ष, संभाग प्रभारी-सह प्रभारी, जिला प्रभारी और विधायकों को बैठाकर फीडबैक लिया।
जताई गई नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, अधिकतर जिलों के पदाधिकारियों ने प्रभारी मंत्रियों के सामने शिकायत की कि कार्यकर्ताओं के काम नहीं हो रहे हैं और अधिकारी संगठन की बात नहीं सुनते। प्रभारी मंत्रियों के जिलों में दौरे कम होने और बिजली बिल को लेकर जनता में नाराजगी का मुद्दा भी उठा। कुछ विधायकों ने कहा कि मंत्रियों को बार-बार पत्र लिखने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
मंत्रियों को दो टूक
इन शिकायतों पर जामवाल ने मंत्रियों को दो टूक कहा कि वे नियमित रूप से प्रभार वाले जिलों का दौरा करें और जनता की जरूरतों को समझें। सूत्रों के अनुसार, करीब दो महीने पहले मुख्यमंत्री निवास में भी ऐसी बैठक हुई थी। अब संगठन एक बार फिर मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर रहा है।
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