इदरीश मोहम्मद, पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की रत्नगर्भा धरती एक बार फिर सुर्खियों में है। जिले की रुंझ नदी में हीरा मिलने के लालच और उम्मीद में दूर-दराज से आए हजारों लोग दिन-रात अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हीरों की इस चमक के पीछे गरीबी, बेरोजगारी और मजबूरी की एक बेहद कड़वी सच्चाई छिपी हुई है।
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व्यापार में घाटा खाए लोगों से लेकर बिहार-मुंबई तक के लोग शामिल
रुंझ नदी के तट पर फल-सब्जी के व्यापार में भारी घाटा सह चुके स्थानीय व्यापारियों से लेकर सालों से कड़ी मेहनत कर रहीं गरीब महिलाएं तक किस्मत आजमाने पहुंची हैं। इतना ही नहीं अमानगंज, छतरपुर के अलावा बिहार और मुंबई तक से आए लोग यहां भीषण गर्मी और कठोर शारीरिक मेहनत के बीच दिन-रात नदी की कंकड़-मिट्टी छान रहे हैं। कई लोग तो यहां आने-जाने और खाने-पीने में 3 से 4 लाख रुपये तक गंवा चुके हैं, लेकिन किस्मत बदलने की उम्मीद का दीया अब भी जल रहा है। हाल ही में रिंकू कुशवाहा जैसे कुछ लोगों को जब 35 हजार रुपये का छोटा हीरा मिला, तो दूसरों का हौसला और बढ़ गया।
वन विभाग की सख्त कार्रवाई: टपरियां तोड़ीं, खदेड़ी गई भीड़
हालांकि यह पूरा इलाका विश्रामगंज रेंज के वन विभाग के अंतर्गत आता है। नदी क्षेत्र में अवैध खनन और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वन कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर अवैध रूप से हीरा तलाश रहे लोगों की टपरियां तोड़ दी हैं और छनाई में इस्तेमाल होने वाले औजारों को जब्त कर लिया है।
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वन विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद रुंझ नदी के पास जुटी लगभग 5 हज़ार लोगों की भारी भीड़ घटकर अब 100 से 150 के आसपास ही रह गई है। इसके बावजूद, गरीबी और लाचारी से जूझ रहे लोग छिप-छिपाकर अब भी पानी में अपनी किस्मत तलाशने से बाज नहीं आ रहे हैं।
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