अमेरिका-चीन तनाव के बीच अंतरिक्ष से जुड़ी दो घटनाओं ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में जॉर्डन स्थित मुवफ्फाक साल्ती एयर बेस पर ईरानी मिसाइल हमले से पहले तेहरान को चीन से हाई-रिजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरें मिली थीं। हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई और कई घायल हुए।
ईरानी हमले में चीनी इमेजरी के इस्तेमाल का आरोप
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला अमेरिकी बलों पर चीनी सहायता के संभावित घातक प्रभाव का अब तक का सबसे स्पष्ट उदाहरण हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, तस्वीरें हमले से पहले और बाद दोनों समय उपलब्ध कराई गईं, जिससे लक्ष्य चुनने और हमले के बाद नुकसान का आकलन करने में मदद मिल सकती थी।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारी सीधे तौर पर चीनी सरकार की संलिप्तता का आरोप लगाने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि सहयोग मुख्यतः कुछ चीनी कंपनियों के स्तर पर हुआ हो सकता है। चीनी दूतावास ने आरोपों से इनकार किया है।
याओगन-50 सैटेलाइट के टूटने से नई अटकलें
इस घटना के करीब छह सप्ताह बाद चीन का याओगन-50 (02) टोही सैटेलाइट कक्षा में टूट गया। मार्च 2026 में लॉन्च किया गया यह उपग्रह असामान्य रेट्रोग्रेड ऑर्बिट में काम कर रहा था। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने इसके टूटने के बाद कम से कम 43 मलबे के टुकड़े दर्ज किए हैं, जो लगभग 600 से 1,100 किलोमीटर की ऊंचाई पर फैले हैं। इसके टूटने का आधिकारिक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञ तकनीकी खराबी, प्रोपल्शन सिस्टम या बैटरी की समस्या अथवा किसी अन्य मलबे से टक्कर जैसी संभावनाएं जता रहे हैं।
क्या दोनों घटनाओं का कोई संबंध है?
फिलहाल ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि याओगन-50 को जानबूझकर नष्ट किया गया। दोनों घटनाओं का समय निकट होने के कारण अटकलें जरूर तेज हुई हैं, लेकिन किसी सरकारी पक्ष ने इनके बीच संबंध की पुष्टि नहीं की है।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट इमेजरी और अंतरिक्ष आधारित खुफिया जानकारी कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही, बढ़ता अंतरिक्ष मलबा अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच वैश्विक सैटेलाइट सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन रहा है।
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