UPI Charges News: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर संभावित चार्ज को लेकर देश में बहस तेज हो गई है। इसी बीच भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए UPI पर किसी भी तरह का शुल्क लगाए जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि UPI की सबसे बड़ी ताकत इसका आसान और मुफ्त होना है।

‘जो पहले से ठीक चल रहा है, उसमें दखल क्यों?’

CNN-News18 से बातचीत में अश्नीर ग्रोवर ने कहा कि अगर UPI पेमेंट पर शुल्क लगाया जाता है, तो ग्राहक और व्यापारी दोबारा कैश की ओर लौट सकते हैं। इससे बैंकों और कारोबारियों पर कैश मैनेजमेंट का खर्च बढ़ेगा।

ग्रोवर ने कहा, “जो चीज पहले से ही ठीक से काम कर रही है, उसमें आप दखल क्यों दे रहे हैं? मुफ्त UPI ही असली UPI है। अगर UPI के लिए पैसे लेने लगेंगे तो समझ लीजिए कि यह खत्म हो गया।”

₹2,000 की सीमा पर भी उठाए सवाल

UPI Charges को लेकर जारी बहस में ₹2,000 की लिमिट भी चर्चा का केंद्र है। ग्रोवर ने दावा किया कि ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन संख्या के हिसाब से करीब 4% हैं, लेकिन वैल्यू के लिहाज से इनकी हिस्सेदारी लगभग 66% है।

उनके मुताबिक, सरकार ने एक आसान सीमा तय की है, लेकिन इसके पीछे स्पष्ट आर्थिक तर्क नजर नहीं आता। उन्होंने आशंका जताई कि संभावित शुल्क का बोझ व्यापारी ग्राहकों पर डाल सकते हैं या बड़े भुगतान को छोटे-छोटे UPI ट्रांजैक्शन में बांटने की कोशिश कर सकते हैं।

‘UPI से किसे और कितना नुकसान?’

अश्नीर ग्रोवर ने यह सवाल भी उठाया कि UPI को लेकर सरकार वास्तव में कितनी सब्सिडी देती है, जिसे शुल्क के जरिए वसूलने की जरूरत पड़ रही है। उन्होंने UPI की तुलना भारत के ATM और कैश लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से करते हुए कहा कि इसे संचालित करने की सालाना लागत करीब ₹30,500 करोड़ बताई जाती है।

उन्होंने RBI, बैंकों और NPCI की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए पूछा कि आखिर UPI की वजह से वास्तविक नुकसान किसे हो रहा है और उस नुकसान की भरपाई के लिए आम लोगों पर शुल्क लगाने की जरूरत क्यों है।

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