अमरितेश सिन्हा, मुंगेर। सदर अस्पताल में इलाज के दौरान एक बंदी की मौत हो जाने के बाद परिजनों के बीच कोहराम मच गया है। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने सीधे तौर पर जेल प्रशासन पर इलाज में भारी लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं दूसरी ओर, जेल प्रशासन का अपना पक्ष है कि बंदी का लगातार बेहतर इलाज कराया जा रहा था और उसे हायर सेंटर रेफर किए जाने की प्रक्रिया चल रही थी, इसी बीच उसकी मौत हो गई।

​कौन था मृतक और क्या था मामला?

​मृतक की पहचान असरगंज थाना क्षेत्र के कमराय गांव के रहने वाले संजय कुमार साह उर्फ मोहरा के रूप में की गई है। जेल अधीक्षक किरण निधि से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत 23 जून 2026 को असरगंज थाना पुलिस ने माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में संजय कुमार साह को मंडल कारा में दाखिल कराया था।
​मृतक के भाई अमरदीप साह ने मीडिया को जानकारी दी कि संजय एचआईवी (HIV) पॉजिटिव था। गांव में नाले के विवाद को लेकर हुई एक मारपीट की घटना के सिलसिले में वह नामजद अभियुक्त था। असरगंज थाना पुलिस ने उसे 22 जून को गिरफ्तार किया था और अगले दिन कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय के आदेश पर मंडल कारा भेज दिया था। संजय अपने पूरे परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी के अलावा एक पुत्र और एक पुत्री हैं, जिनके सिर से अब कमाने वाले सहारे का साया उठ चुका है।

​जेल प्रशासन का पक्ष

​जेल अधीक्षक किरण निधि ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए बताया कि संजय कुमार साह लंबे समय से एक गंभीर बीमारी की चपेट में था। उसकी तबीयत जब भी बिगड़ती थी, जेल प्रशासन द्वारा उसे तुरंत इलाज के लिए मुंगेर सदर अस्पताल भेजा जाता था।
​जेल प्रशासन के मुताबिक, घटना वाले दिन यानी सोमवार की सुबह भी उसका अस्पताल में विधिवत इलाज कराया गया था और स्थिति सामान्य होने पर उसे वापस जेल भेज दिया गया था। हालांकि, देर रात उसकी तबीयत अचानक से फिर काफी ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उसे तुरंत दोबारा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने जब मरीज की स्थिति की गहन जांच की, तो उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए किसी हायर सेंटर रेफर करने की अनुशंसा की। सुरक्षा बल के जवान उपलब्ध होने के बाद उसे वहां से रेफर करने की पूरी तैयारी चल रही थी, लेकिन दुर्भाग्यवश कागजी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने से पहले ही इलाज के क्रम में उसकी मौत हो गई।
​इस घटना के बाद से जहां एक तरफ परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।