मुजफ्फरपुर पुलिस ने फर्जी पेमेंट रसीद और स्क्रीनशॉट दिखाकर दुकानदारों से ठगी करने वाले एक शातिर अंतरजिला साइबर अपराधी गिरोह का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन और ठगी किए गए 188 पीस मोबाइल फोल्डर बरामद किए गए हैं, जिनकी बाजार में अनुमानित कीमत करीब 1.10 लाख रुपए है।
कैसे दिया वारदात को अंजाम?
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के अनुसार, मामला 19 सितंबर 2026 का है। साइबर थाने में ‘क्राउन फोल्डर’ दुकान के मालिक भाग्य भूषण ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों ने व्हाट्सएप के जरिए संपर्क कर मोबाइल फोल्डर का आर्डर दिया था। इसके बाद 15 सितंबर को 43,000 रुपए और 16 सितंबर को 77,314 रुपए यानी कुल 1,20,314 रुपए के फर्जी ट्रांजैक्शन की जाली रसीद और स्क्रीनशॉट भेज दिए।
आरोपियों ने रैपिडो डिलीवरी कूरियर के माध्यम से कांटी छिन्नमस्तिका मंदिर के पास कुल 210 मोबाइल फोल्डर मंगवा लिए थे। जब दुकानदार ने अपना बैंक स्टेटमेंट चेक किया, तब उनके साथ हुई इस बड़ी ठगी का खुलासा हुआ।
मात्र 8 घंटे में मास्टरमाइंड गिरफ्तार
शिकायत मिलने पर साइबर थाने में केस दर्ज किया गया। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश और नगर पुलिस अधीक्षक की देखरेख में गठित विशेष टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महज 8 घंटे के भीतर मुख्य आरोपी मनीष कुमार को धर दबोचा। उसके पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी मनीष दिव्यांग है और वह पहले मोबाइल रिपेयरिंग का काम करता था। तकनीकी जानकारी होने के कारण वह डिजिटल टूल्स और जाली ऐप्स की मदद से हूबहू असली दिखने वाली फर्जी पेमेंट रसीद तैयार करता था।
दो अन्य सहयोगी भी धराए
मास्टरमाइंड मनीष की निशानदेही पर पुलिस ने रैपिडो के जरिए डिलीवरी लेने वाले सहयोगी रिमझिम कुमार को मोतीपुर से गिरफ्तार कर लिया, जिसके पास से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल और मोबाइल मिला। इसके बाद दोनों की निशानदेही पर ठगी के सामान को खरीदने वाले मोबाइल दुकान संचालक मो. परवेज आलम को भी राजेपुर ओपी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य नेटवर्क और आपराधिक इतिहास की कड़ाई से जांच कर रही है।



