कुमार उत्तम, मुजफ्फरपुर। जिले में पुलिस और प्रशासनिक महकमे ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मुजफ्फरपुर कोर्ट परिसर की दुकानों से धड़ल्ले से बेचे जा रहे नकली स्टांप पेपर और फर्जी वेलफेयर टिकटों का भंडाफोड़ किया गया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य मुख्य सरगना की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

​छापेमारी में हुआ बड़ा खुलासा

​यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब एसडीओ पूर्वी को कोर्ट परिसर की कुछ दुकानों में नकली स्टांप और वेलफेयर टिकट बेचे जाने की गुप्त सूचना मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ पूर्वी ने कार्यपालक दंडाधिकारी रामनाथ कुमार को गोपनीय जांच का जिम्मा सौंपा।
​जांच के दौरान कोर्ट परिसर की कुल चार दुकानों में नकली स्टांप पेपर और फर्जी वेलफेयर टिकटों की बिक्री होने की आधिकारिक पुष्टि हुई। इसके बाद कार्यपालक दंडाधिकारी रामनाथ कुमार के लिखित आवेदन पर नगर थाना में संबंधित धाराओं के तहत कांड संख्या 465/2026 दर्ज किया गया।

​विशेष टीम का गठन और गिरफ्तारियां

​घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए सीनियर एसपी के निर्देश और सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के अनुश्रवण में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व नगर एसडीपीओ-1 डॉ. सुरेश कुमार कर रहे थे, जिसमें नगर थाना के पुलिस पदाधिकारी भी शामिल थे।
​वैज्ञानिक अनुसंधान (तकनीकी जांच) और मानवीय खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने ताबड़तोड़ दबिश दी:

  • ​मुरारी कुमार और प्रभात चौधरी को नगर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
  • ​रमेश कुमार को सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से दबोचा गया।
  • ​गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने कुल 9 फर्जी स्टांप पेपर और 32 फर्जी वेलफेयर टिकट बरामद किए हैं, जिनका उपयोग कोर्ट के कागजी कार्यों में अवैध रूप से किया जा रहा था।

​मास्टरमाइंड की तलाश जारी

​सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। इस अवैध रैकेट में संलिप्त एक अन्य मुख्य आरोपी सत्यम कुमार फिलहाल फरार चल रहा है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
​पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस रैकेट की जड़ें काफी गहरी हैं। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और यह नकली स्टांप पेपरों का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा था। पुलिस इस सिंडिकेट के अन्यपुटों को खंगालने में जुटी हुई है।