वीरेंद्र कुमार, नालंदा। जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में आगामी 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर न्यायिक महकमा पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इस राष्ट्रीय लोक अदालत को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और न्यायपालिका ने अपनी कमर कस ली है, जिसके तहत हजारों पेंडिंग मामलों के निपटारे की पुख्ता रूपरेखा तैयार की गई है। इस बहुप्रतीक्षित आयोजन से जिले के हजारों वादकारियों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
उच्चाधिकारियों की अध्यक्षता में अहम बैठक और कार्ययोजना
राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों की समीक्षा और सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, नालंदा (बिहारशरीफ) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कुलदीप, रोहन रंजन, एसीजेएम द्वितीय प्रमोद कुमार शर्मा, और एसडीजेएम सुश्री प्रियांशु शर्मा सहित जिले के तमाम प्रमुख न्यायिक दंडाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य मामलों के निष्पादन में तेजी लाना और सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना था।
प्री-सिटिंग और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया तेज
न्यायिक समीक्षा बैठक के दौरान यह अहम जानकारी सामने आई कि इस बार की लोक अदालत के लिए कुल 5,600 मामलों को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है। इन चिन्हित मामलों से संबंधित पक्षों तक सूचना पहुंचाने के लिए अब तक कुल 11,112 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके साथ ही मामलों के निष्पादन की गति को और तेज करते हुए अब तक 651 मामलों की प्री-सिटिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है, जिनमें से 117 मामलों में अंतिम अवार्ड भी तैयार कर लिए गए हैं।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की लगातार मॉनिटरिंग
राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों पर पानी की तरह नजर रखने और हर गतिविधि को सुचारू बनाने की जिम्मेदारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव राजेश कुमार गौरव संभाल रहे हैं। उनकी देखरेख में हर न्यायालय से प्रतिदिन चिन्हित मामलों की प्रगति, जारी नोटिसों की संख्या और प्री-सिटिंग की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट ली जा रही है। इस पूरी रिपोर्टिंग की नियमित जानकारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, नालंदा को सौंपी जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे।
न्याय प्रशासन का निर्देश: अधिकाधिक मामलों का हो समाधान
बैठक के अंत में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को सख्त और स्पष्ट निर्देश दिए कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ काम करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि अधिक से अधिक वादों का आपसी समझौते के आधार पर निष्पादन हो सके। साथ ही, सभी जजों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे हर दिन की प्रगति रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव को समय पर उपलब्ध कराएं। इन तमाम पुख्ता तैयारियों से साफ जाहिर है कि नालंदा में 12 सितंबर को लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत आम जनता के लिए न्याय के त्वरित समाधान का एक बड़ा माध्यम बनने जा रही है।


