पटना/नालंदा। बिहार में पटना उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों के बाद नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों की हो रही गहन जांच का असर दिखने लगा है। इसी कड़ी में निगरानी विभाग ने नालंदा जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच फर्जी शिक्षकों के खिलाफ संबंधित थानों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। फर्जीवाड़े का यह खुलासा शिक्षा विभाग में हड़कंप मचाने वाला है।
जांच में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा
निगरानी विभाग के पुलिस अवर निरीक्षक सह कनीय सहायक जांचकर्ता वीरेन्द्र पासवान द्वारा दर्ज कराई गई इन प्राथमिकियों में पांच शिक्षकों को नामजद किया गया है। ये सभी शिक्षक हिलसा, राजगीर और सिलाव प्रखंडों में कार्यरत थे। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों का विवरण संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड से कतई मेल नहीं खाता है। उल्लेखनीय है कि अब तक नालंदा जिले में ही ऐसे 80 से अधिक शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है।
इन शिक्षकों पर गिरी गाज
निगरानी विभाग की जांच के बाद जिन शिक्षकों पर धोखाधड़ी, कूट रचना और फर्जी दस्तावेज का उपयोग करने का मामला दर्ज किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- हिलसा: उत्क्रमित मध्य विद्यालय पचरुखिया की शिक्षिका शारदा रानी।
- राजगीर: मध्य विद्यालय अंडबस के शिक्षक मो. जाहिद परवेज।
- सिलाव: उत्क्रमित मध्य विद्यालय धामर के सुबोध कुमार, उत्क्रमित मध्य विद्यालय पचवारा के नीरज कुमार और मध्य विद्यालय नानंद के मणि शंकर शर्मा।
विशेष रूप से शिक्षिका शारदा रानी के मामले में, उन्होंने अपना बीएड प्रमाणपत्र उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर (ओडिशा) का दिखाया था। लेकिन जब निगरानी टीम ने विश्वविद्यालय से नाम, रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर का सत्यापन कराया, तो विश्वविद्यालय ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि ये विवरण उनके अभिलेखों में उपलब्ध ही नहीं हैं।
बिचौलियों की तलाश में जुटी पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजगीर के डीएसपी संजीत कुमार गुप्ता ने बताया कि सभी संबंधित थानों में मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस बारीकी से जांच कर रही है। अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने वाले किसी संगठित गिरोह या बिचौलियों की इसमें क्या भूमिका रही है।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग को भी सूचित कर दिया गया है। इन शिक्षकों पर अब सेवा समाप्ति की तलवार लटक रही है, जिसकी प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी। यह कार्रवाई उन सभी नियोजित शिक्षकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी प्राप्त की है।

