नालंदा। जिले में शराब तस्करों ने खाकी को चुनौती देते हुए पुलिस टीम पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इस खौफनाक वारदात में एक युवा सिपाही की गोली लगने से मौत हो गई। घटना के बाद से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और अपराधियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।

​गुप्त सूचना पर शुरू हुआ था पीछा

पटना मुख्यालय की एक्साइज इंटेलिजेंस ब्यूरो (ईआईबी) को एक गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड से शराब की एक बड़ी खेप गाड़ी में भरकर नालंदा लाई जा रही है। इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए पटना ईआईबी टीम, राजगीर उत्पाद विभाग के सब-इंस्पेक्टर और स्थानीय पुलिस ने मिलकर तस्करों की घेराबंदी शुरू कर दी। झारखंड की ओर से आ रही शराब लदी पिकअप वैन जैसे ही नवादा जिले के खराट मोड़ से आगे बढ़ी, पुलिस टीमों ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया।

​गाड़ी रोकने के इशारे पर की फायरिंग

पावापुरी और गिरियक इलाके में हाईवे पर तस्कर फ्लाईओवर के नीचे की सड़क से भागने लगे। जब पुलिस ने उनकी गाड़ी को रोकने की कोशिश की, तो आगे चल रही एक काले रंग की स्कॉर्पियो से अपराधियों ने पुलिस टीम पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। तस्करों की इस ताबड़तोड़ गोलीबारी का शिकार पुलिस वैन में ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठे 30 वर्षीय सिपाही अजीत कुमार हो गए। उनके सिर में एक गोली आ लगी, जिससे वे लहूलुहान होकर गिर पड़े।

​इलाज के दौरान तोड़ा दम

गोली लगते ही साथी पुलिसकर्मियों ने घायल सिपाही को तुरंत पावापुरी के भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना के पीएमसीएच (PMCH) रेफर कर दिया। पटना ले जाने पर इलाज के दौरान सिपाही अजीत कुमार ने दम तोड़ दिया। उनके शव का पोस्टमॉर्टम पटना में कराया जा रहा है।

​नगमा गांव के रहने वाले थे शहीद अजीत

मृतक सिपाही अजीत कुमार नालंदा जिले के नगरनौसा प्रखंड के नगमा गांव के निवासी थे। उनके परिवार में कानून व्यवस्था से गहरा नाता रहा है; उनके पिता मदन कुमार झारखंड पुलिस में दारोगा के पद से साल 2025 में सेवानिवृत्त हुए थे। तीन भाइयों में मंझले अजीत ने करीब चार साल पहले ही मद्य निषेध विभाग में सिपाही के तौर पर ज्वाइन किया था। इस घटना से उनके परिवार और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।