नारनौल। अनाज मंडी में बाजरे की फसल लेकर पहुंच रहे किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। सरकार ने बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन सरकारी खरीद की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण किसानों को मंडी में अपनी फसल निजी खरीदारों को कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। निजी खरीदार किसानों से करीब 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बाजरा खरीद रहे हैं। ऐसे में किसानों को MSP के मुकाबले करीब 650 से 700 रुपये प्रति क्विंटल तक कम कीमत मिल रही है।

किसानों के सामने अब दोहरी स्थिति बनी हुई है। एक ओर उन्हें अपनी फसल कम दाम पर बेचने का दबाव है, तो दूसरी ओर सरकारी खरीद का इंतजार करने पर मंडी में फसल रखने और भुगतान में देरी की चिंता बनी हुई है।

9000 क्विंटल बाजरे की खरीद, सरकारी एजेंसी ने खरीदा सिर्फ 37 क्विंटल

नारनौल अनाज मंडी में अब तक करीब 9000 क्विंटल बाजरे की खरीद हो चुकी है। इनमें सरकारी एजेंसी की ओर से महज 37 क्विंटल बाजरा खरीदा गया है। सरकारी और निजी खरीद के आंकड़ों में यह बड़ा अंतर सरकारी खरीद की धीमी रफ्तार को साफ तौर पर दिखाता है।

18,400 किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन

आंकड़ों के अनुसार नारनौल क्षेत्र में करीब 18,400 किसानों ने बाजरे की फसल के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। वहीं करीब 53,000 एकड़ भूमि बाजरे की फसल के लिए पंजीकृत है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था का इंतजार है।

मंडी में बनाया गया हेल्प डेस्क

किसानों की सुविधा के लिए मार्केट कमेटी की ओर से मंडी में व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार मंडी के मुख्य गेट पर हेल्प डेस्क बनाया गया है, जहां किसानों को उनकी समस्याओं और सुविधाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

MSP 2900 रुपये, फिर 2200-2250 में क्यों बिक रहा बाजरा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार ने बाजरे का MSP 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, तो किसानों को मंडी में 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बाजरा बेचने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? सरकारी खरीद की रफ्तार कब बढ़ेगी और किसानों को उनकी फसल का निर्धारित समर्थन मूल्य कब मिलेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब का इंतजार है।

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नारनौल मंडी में बाजरे की सरकारी खरीद धीमी, किसानों को MSP से 700 रुपये तक कम भाव; महज 37 क्विंटल की सरकारी खरीद

नारनौल। अनाज मंडी में बाजरे की फसल लेकर पहुंच रहे किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। सरकार ने बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन सरकारी खरीद की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण किसानों को मंडी में अपनी फसल निजी खरीदारों को कम दाम पर बेचनी पड़ रही है। निजी खरीदार किसानों से करीब 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बाजरा खरीद रहे हैं। ऐसे में किसानों को MSP के मुकाबले करीब 650 से 700 रुपये प्रति क्विंटल तक कम कीमत मिल रही है।

किसानों के सामने अब दोहरी स्थिति बनी हुई है। एक ओर उन्हें अपनी फसल कम दाम पर बेचने का दबाव है, तो दूसरी ओर सरकारी खरीद का इंतजार करने पर मंडी में फसल रखने और भुगतान में देरी की चिंता बनी हुई है।

9000 क्विंटल बाजरे की खरीद, सरकारी एजेंसी ने खरीदा सिर्फ 37 क्विंटल

नारनौल अनाज मंडी में अब तक करीब 9000 क्विंटल बाजरे की खरीद हो चुकी है। इनमें सरकारी एजेंसी की ओर से महज 37 क्विंटल बाजरा खरीदा गया है। सरकारी और निजी खरीद के आंकड़ों में यह बड़ा अंतर सरकारी खरीद की धीमी रफ्तार को साफ तौर पर दिखाता है।

18,400 किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन

आंकड़ों के अनुसार नारनौल क्षेत्र में करीब 18,400 किसानों ने बाजरे की फसल के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। वहीं करीब 53,000 एकड़ भूमि बाजरे की फसल के लिए पंजीकृत है। ऐसे में बड़ी संख्या में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था का इंतजार है।

मंडी में बनाया गया हेल्प डेस्क

किसानों की सुविधा के लिए मार्केट कमेटी की ओर से मंडी में व्यवस्थाएं किए जाने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार मंडी के मुख्य गेट पर हेल्प डेस्क बनाया गया है, जहां किसानों को उनकी समस्याओं और सुविधाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

MSP 2900 रुपये, फिर 2200-2250 में क्यों बिक रहा बाजरा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार ने बाजरे का MSP 2900 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, तो किसानों को मंडी में 2200 से 2250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बाजरा बेचने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? सरकारी खरीद की रफ्तार कब बढ़ेगी और किसानों को उनकी फसल का निर्धारित समर्थन मूल्य कब मिलेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब का इंतजार है।