सुप्रिया पाण्डेय, रायपुर। देश की संस्कृति और अनकही कहानियों को सिनेमा के जरिए सामने लाने वाले फिल्म निर्देशक भरतबाला गणपति ने अपने तीन दशक से अधिक के फिल्ममेकिंग अनुभव में भारत की कई अलग-अलग कहानियों को पर्दे पर उतारा है। अब उनकी डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ के जरिए छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की अनूठी परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।


रामनामी समाज की आस्था और संस्कृति पर बनी इस डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलने के बाद भरतबाला ने लल्लूराम डॉट कॉम से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि अब फिल्म को विदेशों में भी दिखाने की योजना है। उन्होंने कहा कि रामनामी समाज की यह अनूठी कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचनी चाहिए। डॉक्यूमेंट्री में समाज की आस्था, परंपरा और जीवनशैली को करीब से दिखाने की कोशिश की गई है।

तीन दशक से ज्यादा के फिल्मी अनुभव के बाद भरतबाला की नजर छत्तीसगढ़ की इस अनूठी सांस्कृतिक विरासत पर पड़ी और अब ‘राम-नामी’ की कहानी अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि डॉक्यूमेंट्री को इस महीने अमेरिका में दिखाएंगे। लॉस एंजेलिस, सैन फ्रांसिस्को जैसे बड़े शहरों में इस डॉक्यूमेंट्री को दिखाएंगे।
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