हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब में नशे की गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने युवा पीढ़ी को बचाने के लिए इसे एक बड़ा सामाजिक संकट बताया है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini का पंजाब को लेकर दिया गया एक बयान अब राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। एक बच्चे को गोद में बैठाकर मुख्यमंत्री ने कहा कि “पंजाब का भविष्य सुरक्षित करने के लिए हम सभी को एकजुट होकर आगे आना होगा। चिट्टा आज केवल एक नशा नहीं, बल्कि हमारी युवा पीढ़ी, परिवारों और समाज के भविष्य पर मंडराता एक गंभीर संकट बन चुका है।” मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पंजाब में नशे, खासकर “चिट्टा” को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस जारी है।

पंजाब में “चिट्टा” का मुद्दा कोई नया नहीं है। वर्षों से विभिन्न राजनीतिक दल राज्य में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की लत को बड़ा सामाजिक संकट बताते रहे हैं। विपक्षी दल लगातार राज्य सरकारों-चाहे पहले की हों या मौजूदा- पर नशे के नेटवर्क को रोकने में विफल रहने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, पंजाब सरकार समय-समय पर दावा करती रही है कि नशा तस्करी के खिलाफ अभियान चलाए जा रहे हैं और कार्रवाई तेज की गई है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह सवाल अब भी उठता है कि क्या हालात उतने बदले हैं, जितने दावों में दिखाई देते हैं।

इसी बीच, हरियाणा के मुख्यमंत्री का पंजाब के सामाजिक मुद्दे पर सार्वजनिक बयान कई राजनीतिक मायनों में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह केवल सामाजिक चिंता जताने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पड़ोसी राज्य के संवेदनशील मुद्दे पर एक प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी के रूप में भी देखा जा सकता है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री ने यह संदेश एक छोटे बच्चे को गोद में लेकर दिया, जिससे उनके बयान को भविष्य की पीढ़ी और सामाजिक सुरक्षा के प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर भी जोड़ा जा रहा है।

विपक्षी हलकों में ऐसे बयानों को लेकर यह तर्क भी दिया जाता रहा है कि किसी दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा सार्वजनिक रूप से इस तरह टिप्पणी करना “राजनीतिक दखल” के रूप में भी देखा जा सकता है, खासकर तब जब मामला किसी राज्य की कानून-व्यवस्था और सामाजिक स्थिति से जुड़ा हो। वहीं भाजपा समर्थक इसे सीमा पार सामाजिक सरोकार और युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता बता रहे हैं।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो हरियाणा और पंजाब की राजनीति लंबे समय से कई मुद्दों- जैसे जल, कृषि, कानून व्यवस्था और क्षेत्रीय हितों- पर एक-दूसरे से जुड़ती रही है। ऐसे में नशे जैसे गंभीर विषय पर हरियाणा के मुख्यमंत्री का बयान आने वाले दिनों में पंजाब की सियासत में भी चर्चा का विषय बन सकता है।

अब सवाल यही है कि क्या इसे सिर्फ सामाजिक चिंता माना जाएगा, या फिर पंजाब की राजनीति में यह बयान नई बहस और राजनीतिक प्रतिक्रिया को जन्म देगा। फिलहाल, “चिट्टा” और युवाओं के भविष्य को लेकर मुख्यमंत्री का यह संदेश दोनों राज्यों की राजनीतिक चर्चा में जगह बना चुका है।