दिल्ली-एनसीआर रीजनल प्लान-2041 के तहत हरियाणा में करीब 20 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश से गुरुग्राम-फरीदाबाद के अलावा 8 नए शहरों को बड़े आर्थिक हब के रूप में चमकाया जाएगा।
चंडीगढ़। दिल्ली-एनसीआर की बदलती तस्वीर के बीच अब विकास का केंद्र केवल गुरुग्राम और फरीदाबाद तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। एनसीआर रीजनल प्लान-2041 ने हरियाणा के उन छोटे शहरों को नई पहचान देने की व्यापक तैयारी कर ली है, जो अब तक केवल बड़े शहरी बाजारों की छाया में सिमटे रहे हैं। करीब 20 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड निवेश की संभावना वाले इस मेगा विजन में गुरुग्राम-फरीदाबाद से आगे बढ़कर अब सोनीपत, पानीपत, भिवानी, रेवाड़ी, धारूहेड़ा, बावल, नूंह, महेंद्रगढ़ और पलवल को नए ग्रोथ सेंटर के रूप में तेजी से उभारा जाएगा, जिससे पूरे प्रदेश का कायाकल्प होगा।
कनेक्टिविटी और रोजगार पर विशेष फोकस
अब तक आईटी, कारपोरेट हब और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण गुरुग्राम को एनसीआर की आर्थिक रीढ़ माना जाता था। लेकिन लगातार बढ़ती आबादी, जमीन की सीमित उपलब्धता और आसमान छूती कीमतों की वजह से अब विकास को नए क्षेत्रों की तरफ मोड़ा जा रहा है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत ’30 मिनट एनसीआर’ की सोच है, जिसके अंतर्गत प्रमुख शहरों को रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से जोड़ना मुख्य लक्ष्य रखा गया है। प्रगति ग्रुप के चेयरमैन कर्नल (रिटा.) जितेंद्र यादव के अनुसार, आगामी वर्षों में एनसीआर का यह ढांचागत विकास बहु-केंद्रित होगा, जिससे रोजगार और शिक्षा का विस्तार होगा।
गुरुग्राम का दबाव होगा बेहद कम
इस बदलाव को रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञ भी एक बड़े और सकारात्मक अवसर के रूप में देख रहे हैं। थ्री बी रियलिटी के निदेशक रोहित यादव का मानना है कि जिस तरह गुरुग्राम ने वैश्विक कंपनियों को आकर्षित किया, ठीक उसी तर्ज पर अब आसपास के शहरों में नई टाउनशिप और सर्विस सेक्टर विकसित किए जाएंगे। इससे गुरुग्राम पर बुनियादी सुविधाओं को लेकर बढ़ता दबाव काफी कम होगा और पूरे हरियाणा में संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट के चेयरमैन विवेक सिंह राव के मुताबिक, यह 2041 का मास्टर प्लान उत्तर भारत के आर्थिक भूगोल को पूरी तरह बदलने वाला रोडमैप साबित होगा।

