पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में 6 जनवरी 2025 को एक नीट छात्रा के बेहोश मिलने और इलाज के दौरान उसकी मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट में हुई, जहां सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई।

​एसआईटी और सीबीआई की जांच पर अदालत का गुस्सा

​सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई के केस आईओ और पटना पुलिस की एसआईटी प्रमुख सह सचिवालय एसडीपीओ डॉ. अनु कुमारी से सीसीटीवी फुटेज और दूसरे तकनीकी सबूत जुटाने में हुई लापरवाही को लेकर कई तीखे सवाल किए। उनकी तरफ से दिए गए जवाब से अदालत बिल्कुल संतुष्ट नहीं हुई। पटना हाईकोर्ट के वकील राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, सीबीआई ने हड़बड़ी में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है और अनुसंधान सही दिशा में आगे नहीं बढ़ा है।

​आत्महत्या के तर्क पर उठे सवाल

​सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। इस पर वकील ने कहा कि आत्महत्या का जो तर्क दिया गया है, वह तथ्यों के आधार पर बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। जो भी आरोप लगाए गए थे, उनकी ठीक से जांच नहीं की गई है। इससे पहले इस मामले में लापरवाही बरतने वाले चित्रगुप्त नगर की तत्कालीन एसएचओ रोशनी कुमारी और कदमकुआं के पदाधिकारी हेमंत झा को सस्पेंड भी किया गया था, हालांकि बाद में उनका निलंबन खत्म हो गया था।
​अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई आगामी 6 नवंबर को होगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।