विकास कुमार, सहरसा। टीचर ट्रेनिंग कॉलेज में कार्यरत सफाईकर्मियों के सामने इस बार त्योहार की खुशियों पर मायूसी छा गई है। पिछले तीन महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं होने से नाराज मजदूरों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन किया। मजदूरों का आरोप है कि दशहरा का बड़ा त्योहार सिर पर है, लेकिन तीन महीने से एक पैसा नहीं मिलने के कारण उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। बच्चों की जरूरतों और त्योहार के खर्चों को पूरा करना उनके लिए असंभव साबित हो रहा है।
एजेंसी और प्रबंधन के चक्कर काटने को मजबूर
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने हक के पैसे मांगने के लिए लंबे समय से आउटसोर्सिंग एजेंसी और कॉलेज प्रशासन के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार उन्हें केवल जल्द भुगतान का आश्वासन देकर टाल दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इतना ही नहीं, अपनी आवाज उठाने वाले कुछ सफाईकर्मियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के गैर-कानूनी तरीके से ड्यूटी से हटा दिया गया है। इससे मजदूरों के बीच भारी रोष व्याप्त है।
दो दिनों का अल्टीमेटम
अपनी विभिन्न मांगों और बकाया मानदेय के तुरंत भुगतान को लेकर एकजुट हुए सफाईकर्मियों ने कॉलेज प्रशासन और संबंधित एजेंसी को दो दिनों यानी 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। मजदूरों का साफ कहना है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर उनके तीन महीने के बकाए का शत-प्रतिशत भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने काम को पूरी तरह ठप कर देंगे और एक व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासन और एजेंसी की कार्यशैली पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कॉलेज प्रबंधन और संबंधित आउटसोर्सिंग एजेंसी इन गरीब मजदूरों की जायज समस्याओं का समाधान कब तक निकालती है, या फिर यह मामला और उग्र रूप धारण करेगा।

