नीट यूजी परीक्षा में धांधली को लेकर नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. इस खेल की जांच कर रही एजेंसियों की पड़ताल में बेहद सनसनीखेज बात सामने आई है. शुरुआती जांच के मुताबिक, नीट के प्रश्न पत्र किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं थे. इन्हें देश के कम से कम 5 राज्यों में धड़ल्ले से बेचा गया था. पेपर लीक का नेटवर्क इतना बड़ा था कि इसके तार महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान और बिहार तक जुड़े हुए थे. इसने पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है.

सीबीआई सूत्रों की मानें तो नीट परीक्षा के पेपर देश के 5 राज्यों में बिके थे. बिक्री के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है और दूसरे नंबर पर राजस्थान रहा. सॉल्वर गैंग ने पेरेंट्स से करोड़ों रुपये वसूले थी. एजेंसियां नीट यूजी पेपर लीक मामले की जांच में जुटी हैं.

सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि नीट का पेपर 5 राज्यों में बिका था। सबसे ज्यादा बिक्री महाराष्ट्र में हुई और दूसरा नंबर राजस्थान का है। एजेंसी के अधिकारी ने बताया कि अब तक गिरफ्तार हुए आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल गैजेट्स खंगालने के बाद यह जानकारी सामने आई है।

सीबीआई का कहना है कि आगे और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पेपर लीक का मामला और बड़ा निकल सकता है। इसी कारण एजेंसी अभी यह तय नहीं कर पा रही कि कितने छात्रों ने पेपर खरीदा था। जांच में सामने आया है कि कुछ परिजन ने पेपर को आगे दूसरे लोगों तक बेच दिया था।

अब सिर्फ पेपर लीक करने वाले बिचौलिए और मास्टरमाइंड ही नहीं, बल्कि भारी रकम देकर पेपर खरीदने वाले रसूखदार माता-पिता भी केंद्रीय जांच एजेंसियों के सीधे निशाने पर हैं। जांच एजेंसी अब उन सभी पेरेंट्स की लिस्ट तैयार कर रही है, जिनके बैंक खातों से शिवराज मोटेगांवकर, पी.वी. कुलकर्णी या उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे (पुणे) के खातों में पैसे ट्रांसफर हुए थे।

एजेंसी ने पेपर लीक करने और इसे बेचने वाले ज्यादातर बड़े चेहरों को बेनकाब कर दिया है, लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अलावा बाहर के कुछ किरदार अभी भी शक के दायरे में हैं। इनके खिलाफ सबूत जुटाने में एजेंसी की दो टीमें लगी हैं।

नीट यूजी पेपर लीक के खेल में शामिल दलालों और सॉल्वर गैंग ने उम्मीदवारों के भविष्य की कीमत पर अपनी जेबें गर्म कीं. सीबीआई सूत्रों का कहना है कि एक-एक पेपर के लिए अभ्यर्थियों से 20 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक वसूले गए थे. कई पेरेंट्स ने अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के चक्कर में अपनी जीवनभर की कमाई इन जालसाजों के हवाले कर दी. यह पूरा लेन-देन कैश और गुप्त तरीकों से किया गया था, जिससे किसी भी तरह का डिजिटल ट्रेल (सबूत) न छूटे.

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