जुबैर अंसारी, सुपौल। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में जारी भारी बारिश के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। कोसी बराज के अधिकारियों द्वारा लगातार माईकिंग कर सीमावर्ती इलाकों के लोगों को सतर्क किया जा रहा है। मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच नेपाल में मानसूनी गतिविधियां बेहद तीव्र हो गई हैं, जिसका सीधा असर भारत के मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है।

​कोसी बराज पर जलस्तर की स्थिति और डिस्चार्ज

​कोसी नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव और वृद्धि दर्ज की जा रही है। बराज से प्राप्त ताजा अपडेट के अनुसार, शाम 4:00 बजे का डिस्चार्ज 1 लाख 77 हजार 390 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया है, जो लगातार बढ़ते क्रम में बना हुआ है। जलस्तर में हो रही इस बढ़ोतरी को देखते हुए कोसी बराज के सभी फाटकों पर तकनीकी टीम द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

​मौसम विभाग का अलर्ट और मानसूनी गतिविधियां

​मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी से भरपूर हवाओं और एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के आपस में मिलने के कारण नेपाल में मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ गया है। नेपाल के जल एवं मौसम विज्ञान विभाग ने आगामी 25 से 27 सितंबर के दौरान तराई के प्रमुख जिलों विशेषकर कोसी, मधेश, बागमती और लुंबिनी प्रांत के निचले हिस्सों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान नेपाल के पहाड़ी और तराई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश होने की प्रबल आशंका जताई गई है।

​भारत के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा

​नेपाल के पहाड़ी इलाकों में अत्यधिक वर्षा होने से वहां से निकलने वाली नदियों का जलस्तर तेजी से ऊपर आ रहा है। इसका सीधा और गंभीर असर भारत के बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों पर पड़ रहा है। कोसी, गंडक और महानंदा जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे नेपाल से सटे तराई और मैदानी इलाकों में बाढ़ का हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने नदी के निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।