Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा के स्कूलों में पिछले साढ़े तीन महीनों से छात्र त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई करने को मजबूर हैं। आगामी छमाही परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक छात्रों को बिना गलतियों वाली नई किताबें मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं। इसके परिणामस्वरूप, परीक्षा में किस उत्तर को सही मानकर लिखा जाए, इसे लेकर छात्र, अभिभावक और शिक्षक गंभीर असमंजस की स्थिति में हैं।
छात्रों की पाठ्यपुस्तकों में सैकड़ों गलतियां पाए जाने के बाद पूरे राज्य में भारी जन-असंतोष देखा गया था। अभिभावकों और शिक्षाविदों की ओर से उठाई गई लगातार मांगों के बाद स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग ने यह आश्वासन दिया था कि त्रुटिरहित नई किताबें छापकर जल्द वितरित की जाएंगी। हालांकि, इस घोषणा को लगभग दो महीने बीत जाने के बाद भी नई किताबें कब तक मिलेंगी, इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं है। विभागीय मंत्री, सचिव या उच्च अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी न मिलने के कारण स्थिति और चिंताजनक हो गई है।
पाठ्यपुस्तकों में इतने बड़े पैमाने पर हुई गलतियों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गहरा असंतोष व्यक्त किया था। उन्होंने इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए मामले की जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था।
जांच दल ने तत्परता दिखाते हुए पूर्व एससीईआरटी (SCERT) निदेशक मनोज पाढ़ी को गिरफ्तार किया था और एनसीईआरटी (NCERT) से लेकर छपाई तक की पूरी प्रक्रिया की जांच शुरू की थी। हालांकि, अब यह आरोप लगाया जा रहा है कि जांच की गति काफी धीमी पड़ गई है। इतने बड़े पैमाने पर हुई इस लापरवाही या साजिश के लिए मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार था और इसके पीछे का वास्तविक उद्देश्य क्या था, यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।
परीक्षाएं सिर पर होने के कारण, यदि छात्र पुरानी त्रुटिपूर्ण किताबों से पढ़कर परीक्षा देते हैं, तो उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा, इसे लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अभिभावकों और आम जनता ने सरकार से मांग की है कि बिना किसी और देरी के छात्रों को तुरंत शुद्ध एवं सही पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं।
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